स्पीड 500 किमी/घंटे से भी ज्यादा, पटरी को छुए बिना दौड़ती है मैग्लेव ट्रेन! इस पक्षी से प्रेरित है डिजाइन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों जापान के दौरे पर है. इस दौरान उन्होंने गुरुवार को जापान की सुपर हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रेन की सवारी की. 500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही मैग्लेव ट्रेन की रफ्तार देख खुद सीएम योगी भी हैरान रह गए. आज हम आपको जापान की इस तकनीक के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अब भारत में चर्चा का विषय बनी हुई है.

2 / 9आपको जानकर हैरानी होगी कि मैग्नेटिक लेविटेशन को मैग्लेव ट्रेन कहा जाता है, जो पटरियों को स्पर्श किए बिना हवा में तैरकर 600-700 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती हैं. सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स EMS और EDS तकनीक से ट्रेन पटरियों से 1-10 सेंटीमीटर ऊपर उठकर हवा में तैरती है.
3 / 9चीन के 2025 परीक्षण में मैग्लेव ने 700 किमी/घंटा की रफ्तार को छुआ था, जबकि जापान की L0 सीरीज 603 किमी/घंटा का रिकॉर्ड रखती है. ट्रेन की ये स्पीड हवा में उड़ने वाले विमानों को भी टक्कर देती है. भारत में अगर इस रफ्तार से ट्रेन चले तो दिल्ली से मुंबई के बीच का सफर सिर्फ 2 घंटे में पूरा किया जा सकता है.
4 / 9आपको जानकर हैरानी होगी कि मैग्लेव ट्रेन का डिजाइन किंगफिशर पक्षी से प्रेरित है. ट्रेन का अगला हिस्सा नुकीला व लंबा किंगफिशर पक्षी की चोंच से लिया गया, जो हवा प्रतिरोध न्यूनतम करता है. इससे 500 किमी/घंटा से ऊपर स्थिरता बनी रहती है. जैव-प्रेरित इंजीनियरिंग ने शोर और कंपन को 20 डेसिबल तक घटा दिया.
5 / 9मैग्लेव के पहिए-पटरी संपर्क न होने से झटके व शोर लगभग शून्य रहते हैं. यात्री को शांत, आरामदायक सफर मिलता है, जैसे हवाई जहाज में लेकिन जमीन पर. लंबी दूरी पर थकान न होने से इसकी मांग और बढ़ती जा रही है.
6 / 9सुरक्षा के मामले में भी मैग्लेव ट्रेन किसी अभेद्य किले से कम नहीं है. यू-आकार गाइडवे ट्रेन को चारों ओर घेरती है. इसका पटरी से उतरना असंभव माना जाता है. इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम 1.5G एक्सलरेशन से रोक देता है. मैग्लेव ट्रेन के दुर्घटना ग्रस्त होने का चांस महज 1% दावा किया जाता है.
7 / 9मैग्लेव रीजनरेटिव ब्रेकिंग से 30% ऊर्जा वापस ग्रिड भेजती है. कोई डीजल या डिसेल प्रदूषण नहीं, बिजली पर निर्भर. जीवनकाल 50 वर्ष से अधिक, रखरखाव न्यूनतम.
8 / 9खास गाइडवे निर्माण से प्रति किमी लागत 50-100 करोड़ रुपये. मौजूदा ट्रैक पर असंगत, नई इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी. जापान, चीन व दक्षिण कोरिया में सफल, भारत में प्रस्तावित मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर.
9 / 9मैग्लेव हाई-स्पीड रेल का भविष्य है, हाइपरलूप का आधार बनेगी. 1000 किमी/घंटा वैक्यूम ट्यूब टेस्ट हो चुके. शहरी यातायात व पर्यटन को नया आयाम देगी.