महाभारत काल का असली 'लाक्षागृह देखा क्या? आज भी दिखते हैं पांडवों के पदचिह्न
क्या आपने कभी वह जगह देखी है जहां दुर्योधन ने पांडवों को जिंदा जलाने की साजिश रची थी? उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित 'लाक्षागृह' की दीवारें और सीढ़ियां आज भी उस खौफनाक रात और पांडवों के बचने के चमत्कार की गवाही देती हैं.

उत्तर प्रदेश के मेरठ से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बागपत जिले के बरनावा में स्थित लाक्षागृह केवल एक टीला नहीं, बल्कि द्वापर युग का वो जीवंत प्रमाण है जिसे 'महाभारत' में अहम स्थान प्राप्त है. हाल ही में पुरातात्विक दृष्टि से भी इसकी महत्ता और बढ़ गई है. स्थानीय मान्यताओं और प्राचीन अवशेषों के अनुसार, यह वही स्थान है जहां कौरवों ने मोम (लाख) का महल बनवाया था.
पांडवों की गुफा और रहस्यमयी सीढ़ियां
2 / 5इस स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित प्राचीन गुफा और सुरंग है. कहा जाता है कि जब महल में आग लगाई गई थी, तब पांडव इसी गुप्त रास्ते से निकलकर हिंडन नदी के किनारे सुरक्षित पहुंचे थे. आज भी यहां आने वाले श्रद्धालु उन दीवारों और सीढ़ियों को देख सकते हैं जो सदियों पुरानी निर्माण शैली को दर्शाती हैं.
धार्मिक और ऐतिहासिक संगम
3 / 5बरनावा (प्राचीन नाम वारणावत) का यह क्षेत्र ऐतिहासिक धरोहरों से भरा पड़ा है. यहां स्थित बदरुद्दीन शाह की दरगाह और कोट टीला के बीच का विवाद भी लंबे समय तक चर्चा में रहा, लेकिन हालिया कानूनी फैसलों और पुरातात्विक साक्ष्यों ने इसके हिंदू पक्ष और महाभारत कालीन इतिहास को मजबूती दी है.
पर्यटन का उभरता केंद्र
4 / 5UP टूरिज्म अब इस क्षेत्र को 'हेरिटेज ट्रेल' के रूप में विकसित कर रहा है. इसके जरिए देश-विदेश के पर्यटकों को यहां की मिट्टी के टीलों से मिलने वाले प्राचीन अवशेष और गुफा की बनावट को दिखाया जाएगा. इस ट्रेल के माध्यम से लाक्षागृह, सिनौली पुरातात्विक स्थल, और पांडवकालीन गुफाओं को एक साथ दिखाया जाएगा.
गाइड बनेंगे स्थानीय युवा
5 / 5'लाक्षागृह ट्रेल' प्रोजेक्ट सिर्फ घूमने-फिरने का जरिया नहीं, बल्कि रोजगार का एक बड़ा हब बनने जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा फायदा स्थानीय युवाओं और उन कारीगरों को मिलेगा जो पीढ़ियों से अपनी पारंपरिक कला को संजोए हुए हैं। पर्यटकों को इतिहास की बारीकियों से रूबरू कराने के लिए स्थानीय युवाओं को विशेषज्ञ गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे न केवल युवाओं को सम्मानजनक काम मिलेगा, बल्कि पर्यटकों को भी सटीक ऐतिहासिक जानकारी मिल सकेगी।