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Sachin Tendulkar: 'मास्टर ब्लास्टर' सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट इतिहास के सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में गिना जाता है. उन्होंने दो दशक से ज्यादा समय तक इंटरनेशनल क्रिकेट पर राज किया और अपने 24 साल के शानदार करियर में उन्होंने कई ऐसे वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए जिसका टूटना आज भी मुश्किल है. सचिन ने साल 2013 में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया.
2012 में खराब फॉर्म से जूझ रहे थे सचिन

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हालांकि, साल 2012 सचिन के करियर का सबसे मुश्किल दौर रहा. 2011 वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा करने के कुछ ही महीनों बाद सचिन खराब फॉर्म और लगातार उठ रहे सवालों से जूझने लगे थे. इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरों पर खेले गए 8 टेस्ट मैचों में सचिन ने 560 रन बनाए. हालांकि, दोनों सीरीज में भारत को 0-4 से हार मिली.
घरेलू मैदान पर भी कर रहे थे संघर्ष

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इसके बाद घरेलू मैदान पर भी उनका संघर्ष जारी रहा. इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में सचिन 5 मैचों में सिर्फ 112 रन ही बना पाए और उनका औसत 18.6 रहा. इस दौरान सचिन पर 100वें अंतर्राष्ट्रीय शतक का दबाव भी बढ़ता जा रहा था. लेकिन खराब फॉर्म के कारण उनके भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई थी.
कई साथी खिलाड़ी ले चुके थे संन्यास

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सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे उनके पुराने साथी खिलाड़ी पहले ही क्रिकेट को अलविदा कह चुके थे. ऐसे में चर्चा तेज हो गई थी कि अगला नंबर सचिन का हो सकता है. बीसीसीआई उनकी जगह टीम में नए खिलाड़ियों को मौका देने का विचार कर रही थी. तत्कालीन चयन चयन समिति के अध्यक्ष संदीप पाटिल ने एक इंटरव्यू में उस दौर को लेकर बड़ा खुलासा किया है.
संदीप पाटिल ने किया बड़ा खुलासा

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संदीप पाटिल ने विक्की लालवानी के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में बताया कि 2012 में नागपुर टेस्ट के बाद उन्होंने सचिन से मुलाकात की थी और पूछा कि आगे उनकी क्या योजनाएं हैं. चयन समिति का मानना था कि टीम को अब नए खिलाड़ियों को मौका देना चाहिए. यह बात सुनकर सचिन थोड़ा हैरान रह गए थे और उन्होंने पूछा भी कि ऐसा क्यों कहा जा रहा है.
सिलेक्टर्स के फैसले से चौंक गए थे सचिन

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पाटिल ने कहा, "सचिन यह बात सुनकर चौंक गए थे. उन्होंने पूछा- क्यों? फिर मैंने कहा कि चयन समिति को लगता है कि अब हमें आपके रिप्लेसमेंट के बारे में सोचना चाहिए. बाद में उन्होंने मुझे फोन किया और पूछा- क्या आप सच में ऐसा कह रहे हैं? तो मैंन कहा हां."
सचिन तुरंत नहीं लेना चाहते थे संन्यास

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पाटिल ने आगे यह भी बताया कि उस समय सचिन का तुरंत संन्यास लेने का कोई इरादा नहीं था. वह खेलना जारी रखना चाहते थे. हालांकि, एक हफ्ते के भीतर ही उन्होंने वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर लिया. इसके बाद सचिन ने लगभग एक साल और टेस्ट क्रिकेट खेला.
2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा

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2013 के बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में सचिन ने चार टेस्ट में 192 रन बनाए और उनका सर्वोच्च स्कोर 81 रहा. इस सीरीज में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4-0 से हराया था. लेकिन कुछ महीनों बाद उन्होंने आईपीएल से भी दूरी बना ली और आखिरकार 2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया.
वानखेड़े स्टेडियम में अपना आखिरी टेस्ट मैच

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सचिन ने नवंबर 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला और इसी के साथ क्रिकेट इतिहास के सबसे महान करियर में से एक का अंत हो गया. बता दें कि, सचिन के नाम 34,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन हैं और वह 200 टेस्ट मैच खेलने वाले दुनिया के पहले क्रिकेटर हैं.