टी20 वर्ल्ड कप में लगातार नाकाम, फिर भी फाइनल में क्यों खेले अभिषेक शर्मा? कप्तान सूर्या ने बता दी सच्चाई
How Suryakumar Yadav Backed Abhishek Sharma: टीम इंडिया ने 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड को फाइनल में हराकर आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने घर में डिफेंड करने वाली पहली टीम बनकर इतिहास रच दिया. कप्तान सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में 'मेन इन ब्लू' ने अपना तीसरा टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीता, जो एक बड़ी अचीवमेंट है.

भारत ने 255 रनों का बड़ा स्कोर बनाया और फिर कीवी टीम को 159 रनों पर ऑल आउट कर दिया. इस तरह भारत टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे कामयाब टीम बन गई और घर पर खिताब जीतने वाली पहली टीम बन गई. भारत ने अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और ईशान किशन की हाफ-सेंचुरी की बदौलत यह बड़ा स्कोर बनाया, जिसमें भारतीय बैटिंग ऑर्डर ने कीवी बॉलिंग को धूल चटा दी.
2 / 6खासकर अभिषेक ने फाइनल में अपनी तेज फिफ्टी से अपने आलोचकों को जवाब दिया, जिससे मेजबान टीम के लिए पारी तैयार हुई, और फाइनल मुकाबले से पहले खराब फॉर्म के बाद उन्होंने वापसी की. सूर्यकुमार ने युवा बाएं हाथ के बल्लेबाज को अपने खेल पर टिके रहने और अपना नैचुरल गेम खेलने के लिए सपोर्ट किया, जिससे विरोधी टीम मैच जीत सकती है.
3 / 6भारतीय कप्तान ने कहा, 'एक खिलाड़ी के तौर पर यही उसकी पहचान है, जब वो 6 या 8 ओवर बैटिंग करते हैं, तो वो गेम खत्म कर देते हैं. मैंने उससे एक बार कहा था: इस वर्ल्ड कप में 9 गेम हैं, भले ही तुम उनमें से 8 में फेल हो जाओ, सभी 8 में जीरो स्कोर करो, मैं गारंटी लेता हूं कि तुम फाइनल में पहली गेंद का सामना करोगे.'
4 / 6सूर्यकुमार ने बताया कि उन्हें पता था कि ये बस कुछ ही समय की बात है जब ये शानदार बाएं हाथ का बल्लेबाज अपना टच वापस पा लेंगे और उन्होंने पूरे टाइम उसका सपोर्ट किया. 'ऐसे खिलाड़ी बैटिंग करते समय गेम बदल देते हैं. मुझे पता था कि एक दिन ऐसा आएगा जब वो इसे खत्म कर देंगे.'
5 / 6सूर्या ने कहा, 'फाइनल में अक्षर मेरे बगल में बैठा और कहा, हमारी टीम में दुनिया के दो नंबर 1 खिलाड़ी हैं और वे आज अच्छा खेलेंगे.' अभिषेक ने मैच की शुरुआत में ही सिर्फ डेढ़ दर्जन गेंदों पर 50 रन बनाकर भारत को जबरदस्त शुरुआत दिलाई और मैच का पलड़ा मेजबान टीम की तरफ झुका दिया.'
6 / 6टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने बताया, 'अभिषेक बहुत मेहनत कर रहे थे, और फाइनल में उसने 18 गेंदों पर 50 रन बनाए. 6 ओवर में 90 रन. वहां से खेल पूरी तरह से अलग था. ऐसे खिलाड़ियों के साथ बने रहना बहुत जरूरी है.'



















