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भारत ने 255 रनों का बड़ा स्कोर बनाया और फिर कीवी टीम को 159 रनों पर ऑल आउट कर दिया. इस तरह भारत टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे कामयाब टीम बन गई और घर पर खिताब जीतने वाली पहली टीम बन गई. भारत ने अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और ईशान किशन की हाफ-सेंचुरी की बदौलत यह बड़ा स्कोर बनाया, जिसमें भारतीय बैटिंग ऑर्डर ने कीवी बॉलिंग को धूल चटा दी.

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खासकर अभिषेक ने फाइनल में अपनी तेज फिफ्टी से अपने आलोचकों को जवाब दिया, जिससे मेजबान टीम के लिए पारी तैयार हुई, और फाइनल मुकाबले से पहले खराब फॉर्म के बाद उन्होंने वापसी की. सूर्यकुमार ने युवा बाएं हाथ के बल्लेबाज को अपने खेल पर टिके रहने और अपना नैचुरल गेम खेलने के लिए सपोर्ट किया, जिससे विरोधी टीम मैच जीत सकती है.

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भारतीय कप्तान ने कहा, 'एक खिलाड़ी के तौर पर यही उसकी पहचान है, जब वो 6 या 8 ओवर बैटिंग करते हैं, तो वो गेम खत्म कर देते हैं. मैंने उससे एक बार कहा था: इस वर्ल्ड कप में 9 गेम हैं, भले ही तुम उनमें से 8 में फेल हो जाओ, सभी 8 में जीरो स्कोर करो, मैं गारंटी लेता हूं कि तुम फाइनल में पहली गेंद का सामना करोगे.'

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सूर्यकुमार ने बताया कि उन्हें पता था कि ये बस कुछ ही समय की बात है जब ये शानदार बाएं हाथ का बल्लेबाज अपना टच वापस पा लेंगे और उन्होंने पूरे टाइम उसका सपोर्ट किया. 'ऐसे खिलाड़ी बैटिंग करते समय गेम बदल देते हैं. मुझे पता था कि एक दिन ऐसा आएगा जब वो इसे खत्म कर देंगे.'

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सूर्या ने कहा, 'फाइनल में अक्षर मेरे बगल में बैठा और कहा, हमारी टीम में दुनिया के दो नंबर 1 खिलाड़ी हैं और वे आज अच्छा खेलेंगे.' अभिषेक ने मैच की शुरुआत में ही सिर्फ डेढ़ दर्जन गेंदों पर 50 रन बनाकर भारत को जबरदस्त शुरुआत दिलाई और मैच का पलड़ा मेजबान टीम की तरफ झुका दिया.'

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टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने बताया, 'अभिषेक बहुत मेहनत कर रहे थे, और फाइनल में उसने 18 गेंदों पर 50 रन बनाए. 6 ओवर में 90 रन. वहां से खेल पूरी तरह से अलग था. ऐसे खिलाड़ियों के साथ बने रहना बहुत जरूरी है.'