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Satyajit Ray Devi Thriller Movies: कुछ पुरानी थ्रिलर-ड्रामा फिल्में इतनी डरावनी होंती हैं, जिन्हें देखने के बाद आपकी रातों की नींद गायब हो सकती है. इ्न्हीं पुरानी फिल्में में 60s की ये फिल्म आपके होश उड़ा सकती है. IMDb रेटिंग में इसे 7.8 मिला है.

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कुछ पुरानी फिल्में आज की नई थ्रिलर-ड्रामा को सीधा टक्कर देने की ताकत रखती हैं. उन्हीं में से 60s के दशक की ये फिल्म आपके होश उड़ाने के लिए काफी है. इसमें इंसानी स्वभाव और साइकलॉजी की बारीकियों को उभारा गया है. (Credit- Printerest)

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1960 की यह फिल्म देवी (Devi) सत्यजीत रे की मशहूर कृति है. यह एक ऐसी कहानी है जो देखते ही रूह कांप जाती है. IMDb पर 7.8 की ऊंची रेटिंग वाली यह फिल्म डरावनी थ्रिलर नहीं है, लेकिन अंधविश्वास और समाज की कट्टरता से इतनी गहराई से डराती है कि मन में डर बैठ जाता है. (Credit- Printerest)

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अगर फिल्म की कहानी पर बात करें तो यह फिल्म 19वीं सदी के बंगाल में होती है, जिसमें एक अमीर जमींदार कलिकिंकर रॉय (छबी बिस्वास) काली मां के बड़े भक्त हैं. वहीं उनकी छोटी बहू दयामयी (शर्मिला टैगोर) बहुत प्यारी और साधारण लड़की है. उसका पति उमाप्रसाद (सौमित्र चटर्जी) पढ़ाई के लिए कलकत्ता जाता है. (Credit- Printerest)

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इसी बीच एक रात जमींदार को सपना आता है कि दयामयी काली मां का अवतार हैं. सपने के बाद वे उसे देवी मानकर पूजने लगते हैं. घर में मंदिर बनता है, लोग दूर-दूर से दर्शन को आने लगते हैं. दयामयी की जिंदगी बदल जाती है. वह अब इंसान नहीं, देवी बन जाती है. (Credit- Printerest)

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फिल्म में कई ऐसे सीन हैं जो दिल दहला देते हैं. जमींदार का सपना देखने का दृश्य बहुत डरावना है. काली मां की आंखें और दयामयी का चेहरा एक हो जाते हैं. बच्चे की बीमारी का इलाज दयामयी से करवाने का सीन भी चौंका देता है. (Credit- Printerest)

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दयामयी की आंखों में डर, दुख और मजबूरी साफ दिखती है. शर्मिला टैगोर ने फिल्म में ऐसी कमाल की एक्टिंग की है, कि मूवी देखने के बाद आप भी उनके मुरीद हो जाएंगे. कई बाद देखते देखते रोंगटे खड़े हो जाते हैं. फिल्म का अंत भी बहुत प्रभावशाली है, जो सोचने पर मजबूर कर देता है. (Credit- Printerest)

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यह फिल्म भूत-प्रेत वाली थ्रिलर नहीं है, लेकिन अंधविश्वास की थ्रिलर है. यह दिखाती है कि कैसे एक सपने से एक लड़की की जिंदगी नर्क बन जाती है. समाज, परिवार और धर्म के नाम पर महिला को कैसे दबाया जाता है. सत्यजीत रे ने बहुत सादगी से यह बात कही है, लेकिन असर इतना गहरा है कि रूह थरथरा जाती है. (Credit- Printerest)

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सत्यजीत रे की इस फिल्म को 7.8 IMDb रेटिंग मिली है. 93 मिनट्स के ये फिल्म आज भी कल्ट क्लासिक मूवी मानी जाती है. यह पूरी फिल्म आपको YouTube पर बिल्कुल फ्री में देखने को मिल जाएगी. अगर आप अच्छा सिनेमा देखना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए पर्फेक्ट ऑप्शन है. (Credit- Printerest)