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अमेरिका से भारत की ऑयल ट्रेड डील लॉक हुई है और इस डील के बदले भारत टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है. भारत ने यह ट्रेड डील रूस से तेल व्यापार का बलिदान देकर की है. वहीं अब भारत रूस की बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा. हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि वेनेजुएला से कितना तेल खरीदा जाएगा, लेकिन इतना जरूर है कि दोनों देशों के तेल में काफी अंतर है, जिसे हम नीचे दिए गए 4 पॉइंट में जान सकते हैं...

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पहला पॉइंट कि रूस और वेनेजुएला, किसके तेल का शिप दूरी और समय के हिसाब से पहले पहुंचेगा? इसका जवाब यह है कि रूस और भारत के बीच की दूरी काफी कम है वहीं वेनेजुएला से भारत की दूरी काफी ज्यादा है, क्योंकि वेनेजुएला धरती के दूसरे छोर पर बसा है. अगर रूस का ऑयल शिप व्लादिवोस्तोक पोर्ट से नए समुद्री रास्ते से आए तो 24 दिन में भारत पहुंच जाएगा. पुराने स्वेज नहर वाले रास्ते से 35-40 दिन लगते हैं. वहीं वेनेजुएला के ऑयल शिप को भारत पहुंचने में 45 से 50 दिन लगेंगे, यानी वेनेजुएला के मुकाबले रूस का तेल जल्दी पहुंचेगा

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दूसरा पॉइंट कि रूस और वेनेजुएला, किसके शिप में कितना तेल आता है तो इसका जवाब यह है कि रूस के ऑयल शिप एफ्रेमेक्स या सूएजमैक्स जैसे मीडियम साइज के हैं और एक एफ्रेमेक्स में करीब 7 लाख से 10 लाख बैरल तेल लोड हो सकता है. वहीं वेनेजुएला के शिप वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCC) होते हैं, जो विशालकाय दानव जैसे होते हैं और इनमें करीब 20 लाख बैरल तेल लोड हो सकता है. ऐसे में बेशक वेनेजुएला दूर है, लेकिन उसके एक शिप में रूस के 2 शिप के बराबर ऑयल लोड हो जाता है.

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तीसरा पॉइंट कि रूस और वेनेजुएला, दोनों में से किसके तेल की क्वालिटी कैसी है? इसका जवाब यह है कि रूस का तेल हलका और मीठा होता है, क्योंकि रूस का तेल बेहद गहराई और लाखों साल पुरानी चट्टानों से निकलता है, इसलिए शुद्ध और पतला होता है. इस तेल को रिफाइन करना आसान होता है और इससे पेट्रोल-डीजल और जेट फ्यूल बहुत ज्यादा मात्रा में निकलता है. वहीं वेनेजुएला का तेल गाढ़ा और चिपचिपा होता है, जिसमें मिट्टी-रेत और सल्फर वाली गंदगी होती है. इसलिए इस तेल को रिफाइन करना मुश्किल होता है और इन्हीं वजों से वेनेजुएला अपने तेल को सस्ता बेचता है, लेकिन भारत की कई तेल कंपनियां इस कीचड़ भरे तेल से शानदार पेट्रोल निकाल लेती हैं.

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चौथा पॉइंट कि रूस और वेनेजुएला, किसका तेल कहां उतरता है? इसका जवाब यह है कि नायरा एनर्जी रिफाइनरी के लिए रूस का तेल गुजरात के वाडीनार पोर्ट पर उतरता है. वहीं वेनेजुएला का तेल रिलायंस कंपनी के गुजरात के सिक्का पोर्ट पर उतरता है, जो रिलायंस का प्राइवेट पोर्ट है, क्योंकि रिलायंस की रिफाइनरी वेनेजुएला के गंदगी भरे तेल को साफ करने में दुनिया की सबसे बेस्ट रिफाइनरी है. ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर भारत की सरकारी तेल कंपनियों के लिए रूसी तेल रिसीव किया जाता है.