मौत के बाद साधु-संतों का क्यों नहीं होता दाह संस्कार? शव को दी जाती है जल समाधि

मथुरा की आस्था नगरी में फरसा वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध गौ-रक्षक संत चंद्रशेखर की रहस्यमयी मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. ईद के दिन हुई इस घटना ने आक्रोश की लहर पैदा कर दी, लेकिन साथ ही एक धार्मिक सवाल भी मन में उभर आया कि साधु-संतों का दाह संस्कार क्यों नहीं होता?

sadhu jal samadhi
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मथुरा की आस्था नगरी में फरसा वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध गौ-रक्षक संत चंद्रशेखर की रहस्यमयी मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. ईद के दिन हुई इस घटना ने आक्रोश की लहर पैदा कर दी, लेकिन साथ ही एक धार्मिक सवाल भी मन में उभर आया कि साधु-संतों का दाह संस्कार क्यों नहीं होता?  

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जल समाधि क्या है?

जल समाधि क्या है?2 / 9

जल समाधि साधु-संतों के लिए विशेष अंतिम संस्कार की प्रक्रिया है. इसमें उनके शव के साथ भारी पत्थर बांधकर पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाता है. यह विधि बिना अग्नि के शरीर को प्रकृति में समाहित करने का प्रतीक है. शव नदी की गहराई में स्थायी रूप से विलीन हो जाता है.

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दाह संस्कार से परहेज क्यों?

दाह संस्कार से परहेज क्यों?3 / 9

साधु-संत सांसारिक बंधनों से मुक्त हो चुके होते हैं, इसलिए अग्नि से दाह संस्कार उनके त्याग के विरुद्ध माना जाता है. जल तत्व उनके वैराग्यपूर्ण जीवन से मेल खाता है. शास्त्रों में इसे मोक्ष का सरल मार्ग बताया गया है. यह प्रथा प्राचीन ऋषि-मुनियों से चली आ रही है.

जल की पवित्रता का महत्व

जल की पवित्रता का महत्व4 / 9

हिंदू धर्म में जल को वरुण देव का स्वरूप मानकर सबसे पवित्र तत्व माना गया है. सभी शुभ कार्यों में जल अनिवार्य होता है. सृष्टि की उत्पत्ति और लय भी जल से जुड़ी है. देवमूर्तियों का विसर्जन भी इसी कारण जल में किया जाता है.

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पंचतत्व में विलय की अवधारणा

पंचतत्व में विलय की अवधारणा5 / 9

मानव शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के पंचतत्वों से निर्मित होता है. साधु-संतों के लिए जल तत्व प्रधान माना जाता है. दाह संस्कार के बजाय जल समाधि इन तत्वों का संतुलित विलय सुनिश्चित करती है. यह प्रकृति के साथ एकरूपता का प्रतीक है.

प्राचीन परंपरा का आधार

प्राचीन परंपरा का आधार6 / 9

  प्राचीन काल में ऋषि-मुनि स्वयं जल समाधि ग्रहण करते थे. कुछ स्थायी रूप से तो कुछ तपस्या हेतु अस्थायी रूप से जल में समाहित होते थे. यह साधना का चरमोत्कर्ष था. आज भी यह परंपरा सनातन आध्यात्मिकता को जीवंत रखती है.

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पवित्र नदियों का योगदान

पवित्र नदियों का योगदान7 / 9

गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी नदियां मोक्षदायिनी मानी जाती हैं. इनके जल में समाधि से साधु-संतों को परम पद की प्राप्ति का विश्वास है. नदी का प्रवाह उन्हें दिव्य लोकों की ओर ले जाता है. यह आस्था का अभिन्न अंग है.

वैराग्य और संयम का प्रतीक

वैराग्य और संयम का प्रतीक8 / 9

साधु जीवन त्याग, संयम और योग पर आधारित होता है. जल समाधि उनके मोह-माया से परिपूर्ण जीवन को सम्मानित करती है. अग्नि की जटिल प्रक्रिया के बजाय सरल जल प्रवाह उनके सरल जीवन को प्रतिबिंबित करता है. यह आध्यात्मिक ऊर्जा का संरक्षण भी करता है.

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शास्त्रीय मान्यताओं का समर्थन

शास्त्रीय मान्यताओं का समर्थन9 / 9

शास्त्रों में साधु-संन्यासियों के लिए जल समाधि का स्पष्ट विधान है. यह उनके तपोबल को अमर बनाए रखता है. साधना से संचारित शरीर विशेष ऊर्जा का धारक होता है. जल के माध्यम से प्रकृति में इसका विलय ही उचित माना जाता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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