Hanuman Name Prohibited: हिमालय के इस गांव में 'हनुमान जी' का नाम लेना है मना, जानें त्रेतायुग की अनोखी कथा

Hanuman Name Prohibited: हिमालय में बसे एक गांव में 14,000 फीट ऊंचाई पर आज भी हनुमान जी का नाम लेना वर्जित है. न मंदिर, न मूर्ति, न झंडा, यह अनोखी मान्यता इस जगह को बाकी भारत से अलग बनाती है. आइए जानते हैं, इस गांव में 'हनुमान जी' का नाम क्यों मना लेना है?

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त्रेतायुग की अनोखी कथा

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Hanuman Name Prohibited: द्रोणागिरी, करीब 14,000 फीट की ऊंचाई पर बसा एक छोटा-सा गांव, लेकिन अपनी अनोखी मान्यता के कारण पूरे देश में अलग पहचान रखता है. भारत के ज्यादातर हिस्सों में जहां सुबह 'जय बजरंगबली' से शुरू होती है, वहीं इस गांव में हनुमान जी का नाम लेना भी वर्जित है, न कोई मंदिर, न मूर्ति, न झंडा, यहां सब कुछ गायब है.

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त्रेतायुग की वो रात जिसने सब बदल दिया

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रामायण काल में, जब भगवान राम और रावण के बीच युद्ध चल रहा था, तब एक रात सब कुछ बदल गया. युद्ध क्षेत्र में रावण के पुत्र मेघनाद के बाण से लक्ष्मण अचेत हो गए थे. वैद्य सुषेण ने कहा, बस एक ही उपाय है, संजीवनी बूटी, जो हिमालय में मिलती है, और वो भी सूर्योदय से पहले चाहिए! तब हनुमान जी उड़ पड़े हिमालय की ओर… और पहुंच गए द्रोणागिरी.

जब संजीवनी पहचान नहीं पाए हनुमान जी

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समय बहुत कम था और वहां हजारों जड़ी-बूटियां थी. इन जड़ी-बूटियों के बीच हनुमान जी संजीवनी पहचान नहीं पाए. उधर समय निकल रहा था. तभी गांव की एक बुजुर्ग महिला ने उनकी मदद की और पहाड़ का रास्ता बताया. लेकिन समस्या अभी भी थी—कौन सी बूटी? तब हनुमान जी ने अपना फैसला लिया और पूरा पहाड़ ही उठा लिया और उड़ चले!

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गांव का दर्द: एक 'पवित्र चोट'

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लंका में लक्ष्मण ठीक हो गए, लेकिन द्रोणागिरी में एक घाव रह गया. गांव वालों की मान्यता है कि हनुमान जी ने बिना अनुमति पहाड़ उखाड़ा. इससे यहां के स्थानीय देवता लाटू देवता की तपस्या भंग हुई और उनकी भुजा को भी चोट पहुंची आज भी पहाड़ का चपटा शिखर गांव वालों को उसी घटना की याद दिलाता है.

इसलिए आज भी है यह नियम

इसलिए आज भी है यह नियम6 / 8

द्रोणागिरी में इसलिए आज भी है यह नियम कि हनुमान जी का नाम नहीं लिया जाता है. “बजरंगबली”, “संकटमोचन” जैसे शब्द भी नहीं बोले जाते है और लाल झंडा तक नहीं लगाया जाता है. गांव वाले कहते हैं कि यह कोई विरोध नहीं, बल्कि अपनी आस्था और पीड़ा का सम्मान है.

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लाटू देवता: गांव की आस्था का केंद्र

लाटू देवता: गांव की आस्था का केंद्र7 / 8

यहां इस गांव के के मुख्य देवता हैं- लाटू देवता पूरे गांव की आस्था उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है. एक और मान्यता भी है, जिस बुजुर्ग महिला ने हनुमान जी की मदद की थी, उसे समाज से बाहर कर दिया गया और आज भी गांव की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है.0

कहानी से मिलती ये सीख

कहानी से मिलती ये सीख8 / 8

यह कहानी सिर्फ एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि एक गहरी सीख देती है. बड़ा उद्देश्य भी बिना अनुमति पूरा नहीं होना चाहिए. भक्ति के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है. किसी की मदद करते हुए, किसी और को नुकसान न हो, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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