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Plant Vastu Tips: पौधे केवल घर और बालकनी की शोभा ही नहीं बढ़ाते हैं, बल्कि कुछ पौधे वास्तु के दृष्टिकोण से न केवल बहुत संवेदनशील बल्कि बेहद लाभकारी होते हैं। इसलिए इन पौधों के लगाने और रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। यह देखा गया है कि सही दिशा में लगे ये पौधे घर और परिवार की बरकत को बढ़ाते हैं और आने वाले संकटों की ओर भी संकेत करते हैं। लेकिन, जब ये पौधे गलत दिशा लगा दिए जाते हैं, तो जीवन में अनचाही परेशानियां बढ़ जाती हैं, हाथ से पैसा बालू की तरह फिसल जाता हैं यानी धन टिकता ही नहीं है। आइए वास्तु शास्त्र के मुताबिक जानते हैं कि कौन-से पौधे घर की दक्षिण दिशा में भूलकर भी नहीं लगाने चाहिए?

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तुलसी: मां लक्ष्मी की कृपा से जुड़ा पौधा - तुलसी का पौधा घर की पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। यह पौधा भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इसे सुख और समृद्धि का द्वार कहा जाता है। वास्तु के अनुसार तुलसी को उत्तर, उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लगाना शुभ रहता है। दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है। यहां तुलसी लगाने से सकारात्मक ऊर्जा कमजोर हो सकती है। कहा जाता है कि दक्षिण में तुलसी होने से घर में तनाव बढ़ता है। खर्चे अचानक बढ़ सकते हैं। धन टिकने में बाधा आती है। पूजा का पूर्ण फल भी नहीं मिलता है।

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केला: गुरु ग्रह का प्रतिनिधि - केले का पौधा देवगुरु बृहस्पति से संबंधित माना जाता है। गुरुवार को इसकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इसे भगवान विष्णु का प्रिय भी माना जाता है। घर में केले का पौधा समृद्धि और संतति सुख का प्रतीक माना जाता है। लेकिन वास्तु शास्त्र दक्षिण दिशा में इसे लगाने से मना करता है। दक्षिण दिशा में भारी और स्थिर तत्व अनुकूल माने जाते हैं। केला जल तत्व प्रधान पौधा है। यहां लगाने से आर्थिक अस्थिरता आ सकती है। परिवार में मतभेद बढ़ सकते हैं।

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शमी: शनि देव से जुड़ा पवित्र वृक्ष - शमी का पेड़ शनि देव से जुड़ा माना जाता है। दशहरा पर इसकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह शत्रु बाधा को कम करता है और साहस देता है। वास्तु के अनुसार शमी को पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगाया जा सकता है, लेकिन सीधी दक्षिण दिशा में इसे लगाने से बचना चाहिए। यदि शमी गलत स्थान पर हो तो शनि का प्रभाव भारी पड़ सकता है। काम में रुकावट, कर्ज और मानसिक दबाव बढ़ सकता है।

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आंवला: आरोग्य और विष्णु कृपा का प्रतीक - आंवला का वृक्ष भगवान विष्णु से संबंधित माना गया है। कार्तिक मास में इसकी पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। यह स्वास्थ्य और दीर्घायु का प्रतीक है। वास्तु के अनुसार आंवला पूर्व या उत्तर दिशा में अधिक शुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा में लगाने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कहा जाता है कि इससे घर में रोग बढ़ सकते हैं। आय में गिरावट और पारिवारिक असंतोष भी देखने को मिल सकता है।

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अपराजिता: विजय और देवी शक्ति का संकेत - अपराजिता का पौधा देवी दुर्गा और शनि से जुड़ा माना जाता है। यह विजय और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसके नीले या सफेद फूल पूजा में उपयोग होते हैं। इसे आमतौर पर पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ बताया गया है। दक्षिण दिशा में लगाने से इसके सकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं। वास्तु मान्यता के अनुसार इससे घर में अनावश्यक विवाद बढ़ सकते हैं। योजनाएं अटक सकती हैं। धन लाभ में रुकावट आ सकती है।