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यात्री अक्सर शहरों को उन भूमिकाओं से जोड़कर देखते हैं जो वे नक्शे पर निभाते हैं. कुछ जगहें अपने खाने के लिए मशहूर हो जाती हैं, तो कुछ अपनी संस्कृति या समुद्री तट के लिए. कुछ जगहों को इसलिए पहचान मिलती है क्योंकि वे पूरे-पूरे क्षेत्रों को आपस में जोड़ती हैं. 'दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार' (Gateway of South India) की उपाधि एक ऐसे शहर की ओर इशारा करती है, जो लंबे समय से देश-विदेश से आने वाले लोगों का स्वागत करता आ रहा है.
दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार

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यात्री अक्सर शहरों को उन भूमिकाओं से जोड़कर देखते हैं जो वे नक्शे पर निभाते हैं. कुछ जगहें अपने खाने के लिए मशहूर हो जाती हैं, तो कुछ अपनी संस्कृति या समुद्री तट के लिए. कुछ जगहों को इसलिए पहचान मिलती है क्योंकि वे पूरे-पूरे क्षेत्रों को आपस में जोड़ती हैं. 'दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार' (Gateway of South India) की उपाधि एक ऐसे शहर की ओर इशारा करती है, जो लंबे समय से देश-विदेश से आने वाले लोगों का स्वागत करता आ रहा है. यह शहर व्यापार, यात्रा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए दक्षिणी राज्यों में प्रवेश द्वार का काम करता रहा है. तो, आखिर किस शहर को यह नाम मिला है और क्यों? आज इस खबर में जानेंगे.
चेन्नई: दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार

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चेन्नई को व्यापक रूप से 'दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार' (Gateway of South India) के रूप में जाना जाता है; यह एक ऐसा खिताब है जिसकी पुष्टि इसके आधिकारिक उपनामों की सूची में भी होती है. कोरोमंडल तट पर इसकी स्थिति और एक प्रमुख बंदरगाह के रूप में इसके लंबे इतिहास ने इसे शेष भारत और दक्षिणी राज्यों के बीच एक स्वाभाविक कड़ी बना दिया है. समय के साथ, इसके समुद्री बंदरगाह, सड़कें, रेलमार्ग और हवाई अड्डे ने इस पहचान को और मजबूत किया, और शहर को दक्षिण भारत की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए एक अहम पड़ाव बनने में मदद की.
चेन्नई को यह खिताब क्यों मिला?

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चेन्नई का इतिहास औपनिवेशिक काल से जुड़ा है, जब इसे मद्रास के नाम से जाना जाता था. यह शुरुआती ब्रिटिश बस्तियों में से एक बना और मद्रास प्रेसीडेंसी की राजधानी बना, जो कभी दक्षिण भारत के बड़े हिस्सों तक फैली हुई थी. इसका बंदरगाह दक्षिण भारत को वैश्विक व्यापार मार्गों से जोड़ता था और रेल नेटवर्क अंदरूनी इलाकों को तट से जोड़ता था. चूंकि दक्षिण की ओर जाते समय बहुत से लोग मद्रास से होकर गुजरते थे, इसलिए स्वाभाविक रूप से इसे 'प्रवेश द्वार' (Gateway) के रूप में देखा जाने लगा. आज भी अपने व्यस्त हवाई अड्डे और प्रमुख रेलवे स्टेशनों के साथ यह भूमिका जारी है.
चेन्नई में घूमने के लिए ये हैं प्रसिद्ध जगह

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मरीना बीच: मरीना बीच लगभग 13 किलोमीटर तक फैला हुआ है और यह दुनिया के सबसे लंबे प्राकृतिक शहरी बीचों में से एक है. यहां हर दिन लगभग 30,000 लोग आते हैं और यह शहर की सबसे लोकप्रिय सार्वजनिक जगहों में से एक बना हुआ है.
कपालेश्वर मंदिर, मायलापुर

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यह मंदिर पल्लव काल का है और चेन्नई के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थलों में से एक है. इसकी वास्तुकला और यहां का वातावरण इसे पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाते हैं.
सैंथोम बेसिलिका

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संत थॉमस की समाधि पर बना एक प्रमुख ईसाई तीर्थ स्थल.
फोर्ट सेंट जॉर्ज

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भारत में पहला ब्रिटिश किला और वह स्थान जहां से आधुनिक चेन्नई का विकास हुआ.
सरकारी संग्रहालय, एग्मोर

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1851 में खोला गया, यह भारत का दूसरा सबसे पुराना संग्रहालय है. इसमें ऐतिहासिक संग्रह मौजूद हैं, जिनमें राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स भी शामिल हैं.
कई व्यंजन हैं मशहूर

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चेन्नई में पुराने मोहल्ले आधुनिक इमारतों के साथ खूबसूरती से घुलमिल जाते हैं. पर्यटक सुबह मंदिरों, औपनिवेशिक इमारतों और चहल-पहल भरे बाजारों का भ्रमण कर सकते हैं और शाम को कर्नाटक संगीत समारोह में शामिल हो सकते हैं. दिसंबर में होने वाला संगीत सत्र शास्त्रीय संगीतकारों और नर्तकों का विश्व का सबसे बड़ा जमावड़ा है और भारत-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करता है. शहर में इडली और फिल्टर कॉफी से लेकर समुद्री भोजन और चेट्टिनाड व्यंजन तक, कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन मिलते हैं. महाबलीपुरम और कांचीपुरम पास ही हैं और यहां आसानी से एक दिन की यात्रा की जा सकती है.
चेन्नई घूमने के लिए सबसे अच्छा समय?

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चेन्नई में साल के ज्यादातर समय मौसम गर्म और उमस भरा रहता है. मई सबसे गर्म महीना होता है, जिसमें औसत तापमान लगभग 32°C रहता है. जनवरी में मौसम थोड़ा नरम रहता है, तापमान लगभग 25°C होता है, जिससे घूमने-फिरने में ज़्यादा आराम रहता है. चेन्नई घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी के बीच होता है. इस दौरान मौसम ठंडा रहता है, आसमान साफ होता है और बीच पर टहलने या दिन भर की यात्राओं जैसी बाहरी गतिविधियों की योजना बनाना आसान होता है.