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आपने हमेशा एक बड़े भारी भरकम जहाज को जिसका वजन हजारों टन का होता है, उसे समुद्र के बीचों बीच तैरते हुए कभी न कभी देखा होगा, या फिर टीवी में तो जरूर देखा होगा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इतना बड़ा जहाज पानी पर तैरता कैसे रहता है?
समुद्र में कैसे तैरता है एक विशाल जहाज?

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आपने हमेशा एक बड़े भारी भरकम जहाज को जिसका वजन हजारों टन का होता है, उसे समुद्र के बीचों बीच तैरते हुए कभी न कभी देखा होगा, या फिर टीवी में तो जरूर देखा होगा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इतना बड़ा जहाज पानी पर तैरता कैसे रहता है? जबकि एक छोटा सा पत्थर भी अगर आप पानी में फेकेंगे तो वह डूब जाता है. तो फिर कोई जहाज इतने विशाल समुद्र में कैसे नहीं डूबता है? तो आइए जानते हैं कि पानी में इतना बड़ा जहाज कैसे तैरता है.
जहाज के ऊपर तैरने में साइंस कैसे करता है काम?

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दरअसल इसका जवाब है आर्किमिडीज का पुराना लेकिन कमाल का सिद्धांत पानी खुद जहाज को ऊपर धकेलता है क्योंकि जहाज बहुत सारा पानी हटाते हुए चलता है. जहाज का ढांचा बड़ा और खोखला होता है, अंदर ढेर सारी हवा और खाली जगह रहती है, जिससे उसका औसत घनत्व पानी से कम हो जाता है. आइए समझते हैं कि इसमें साइंस कैसे काम करता है.
2200 साल पहले ग्रीक वैज्ञानिक ने खोजा था ये सिद्धांत

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पानी के ऊपर तैरते जहाज के पीछे एक बहुत पुराना राज है. लगभग 2200 साल पहले ग्रीक वैज्ञानिक आर्किमिडीज ने खोजा था. इसे आर्किमिडीज का सिद्धांत या उत्पलावन बल (Buoyancy) कहते है.
कैसे काम करता है ये सिद्धांत?

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मान लीजिए कि आप एक बाल्टी में पानी भरते हैं अब इसमें कोई चीज डाल देते हैं, जैसे कि कोई खिलौना या कोई छोटा डिब्बा. जैसे ही वो चीज पानी में जाती है, वो पानी को थोड़ा-सा धक्का देती है. मतलब पानी को इधर-उधर हटा देती है. जितना पानी हटता है (यानी जितना पानी वो चीज अपनी जगह से बाहर निकाल देती है), उतने पानी का वजन होता है. अब वो हटाया हुआ पानी का वजन उस चीज को नीचे की बजाय ऊपर की तरफ धक्का देता है. इसी ऊपर की ओर लगने वाले धक्के को हम उत्पलावन बल कहते हैं. ये बल ठीक उतने के बराबर होता है जितना पानी हटाया गया उसका वजन है.
क्या है आर्किमिडीज का सिद्धांत?

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आर्किमिडीज के सिद्धांत आसान भाषा में समझते हैं. बता दें कि जब कोई चीज पानी में या किसी भी तरल पदार्थ में थोड़ी या पूरी तरह डूबती है, तो पानी उस चीज को नीचे की बजाय ऊपर की तरफ धक्का देता है. ये ऊपर वाला धक्का ठीक उतने पानी के बराबर होता है, जितना पानी उस चीज ने अपनी जगह से हटा दिया (यानी जितना पानी चीज ने बाहर निकाला).
अंदर से खोखला होता है जहाज?

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अब इसे जहाज पर आसानी से समझते हैं: जहाज बहुत बड़ा होता है अंदर से खोखला (खाली) होता है. उसके अंदर ढेर सारी जगह खाली रहती है- हवा भरी होती है, मशीनें होती हैं, लेकिन ज्यादातर जगह खाली ही रहता है. जब जहाज पानी में उतरता है, तो वो बहुत सारा पानी हटा देता है. जितना पानी हटता है, उतने पानी का वजन जहाज को ऊपर की तरफ जोर ले धकेलता है.
आसान उदाहरण से समझिए कि कैसे तैरता है जहाज

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एक आसान उदाहरण- अगर एक छोटा लोहे का गोला डालो, तो वो बहुत कम पानी हटाता है. उसका अपना वजन ज्यादा होता है, तो पानी का ऊपर वाला धक्का कम पड़ता है- गोला डूब जाता है. लेकिन वही लोहा अगर बड़ा जहाज बनाकर डालो, तो वो बहुत सारा पानी हटा देता है (क्योंकि जहाज बड़ा और खोखला होता है). हटाए पानी का वजन जहाज के पूरे वजन से ज्यादा या बराबर हो जाता है- पानी जहाज को इतना जोर से ऊपर धकेलता है कि वो तैरने लगता है. कोई भी चीज जितना भी पानी हटाती है, उतना ही पानी का वजन उसे ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करता है. अगर ये ऊपर का धक्का चीज के वजन से ज्यादा या बराबर हो, तो चीज तैरती है. अगर कम हो तो डूब जाती है.
सब है घनत्व का खेल

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यह सिर्फ घनत्व (डेंसिटी) का खेला है. जहाज का औसत घनत्व (कुल वजन ÷ कुल वॉल्यूम) पानी से कम रखा जाता है. पानी का घनत्व 1 g/cm³ है, जहाज का औसत घनत्व इससे कम होता है क्योंकि अंदर खाली जगह ज्यादा है.
आज के समय में टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?

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जहाज डिजाइन में कंप्यूटर से कैलकुलेशन करके हल की शेप बनाते हैं ताकि ज्यादा पानी विस्थापित हो. प्लिम्सॉल लाइन लगाते हैं जहाज कितना लोड ले सकता है, वो दिखाती है.. ज्यादा लोड हो तो ज्यादा डूबेगा और उत्प्लावन बल कम पड़ेगा