भारत का वो अनोखा शहर, जिसे कहते हैं 'नदियों की भूमि'! क्या आप जानते हैं इसका नाम?
भारत में नदियां केवल पानी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि यह संस्कृति, आस्था और सभ्यता की पहचान भी हैं. सदियों से नदियों ने खेती, व्यापार और जीवन को आगे बढ़ाया है. यही कारण है कि भारत को नदियों का देश कहा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं भारत के किस राज्य को नदियों को भूमि कहा जाता है और क्यों?

2 / 8देश के कई राज्यों में नदियां बहती हैं, लेकिन एक राज्य ऐसा है जिसे खास तौर पर 'नदियों की भूमि' कहा जाता है.
3 / 8यह राज्य है उत्तराखंड, जहां से कई बड़ी और पवित्र नदियों की शुरुआत होती है. आपने इस राज्य के बारे में सिर्फ यहां की खूबसूरती और पर्यटन को लेकर बाते सुनी होंगे, लेकिन बहुत कम ही लोग यह बात जानते हैं कि इस राज्य को इस खास नाम से भी जाना जाता है.
4 / 8बता दें कि उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों और बर्फीले ग्लेशियरों से देश की महत्वपूर्ण नदियां निकलती हैं. यहां के प्राकृतिक स्रोत न सिर्फ उत्तर भारत, बल्कि पूरे देश के जल संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं.
5 / 8गंगोत्री ग्लेशियर से भागीरथी नदी निकलती है, जो आगे अलकनंदा से मिलकर गंगा बनती है. वहीं, यमुनोत्री ग्लेशियर से यमुना नदी की शुरुआत होती है. ये दोनों नदियां करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन से जुड़ी हैं.
6 / 8उत्तराखंड में पांच प्रमुख संगम स्थल हैं जिन्हें पंच प्रयाग कहा जाता है. विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग यह सभी धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माने जाते हैं और जल प्रणाली के संतुलन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.
7 / 8यह राज्य सिर्फ मुख्य नदियों तक सीमित नहीं है. मंदाकिनी, पिंडर, काली, गौरीगंगा, धौलीगंगा, सरयू और रामगंगा जैसी कई सहायक नदियां यहां बहती हैं, जो पर्यावरण और खेती के लिए बेहद जरूरी हैं.
8 / 8उत्तराखंड की सबसे लंबी नदी काली है, जिसे शारदा नदी भी कहा जाता है. यह नदी लगभग 300 किलोमीटर लंबी है. जो कालापानी क्षेत्र से निकलती है और भारत-नेपाल की प्राकृतिक सीमा बनाती है. नेपाल में इसे महाकाली के नाम से जाना जाता है. (Image: Pexels)