आज तो अलार्म है लेकिन पहले क्या थे उपाय, इन तरीकों से सुबह उठते थे लोग

आज के समय में सोने समय हम अलार्म न सेट करें, ऐसा केवल वीकेंड से पहले हो सकता है। कहीं जाना हो, कहीं पहुंचना हो या समय से कुछ भी करना हो... हम अलार्म लगाना नहीं भूलते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अलार्म आज के जमाने की खोज है, इससे पहले लोग कैसे उठते होंगे। क्या वो विकल्प होंगे जिसने भरोस इंसान चेन की नींद सोता होगा। आइए विस्तार से जानते हैं...

methods to wake up in morning
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आज के डिजिटल दौर में हम स्मार्टफोन के अलार्म से जागते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब बिजली और घड़ियां नहीं थीं, तब दुनिया कैसे जागती थी? ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच मंडराते युद्ध के बादलों ने आज पूरी दुनिया को एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल दिया है। ऐसे में इतिहास के वे पुराने तरीके याद आते हैं जब इंसान तकनीक नहीं, बल्कि अपनी सूझबूझ और अनोखे पेशों के दम पर समय का पाबंद रहता था।

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औद्योगिक क्रांति के दौरान

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औद्योगिक क्रांति के दौरान, विशेष रूप से 1800 और 1900 के बीच, ब्रिटेन में "नॉक अपर्स" नामक एक अनोखा पेशा बहुत लोकप्रिय था। उस समय, कारखाने के श्रमिकों के पास न तो घड़ियां होती थीं और न ही अलार्म खरीदने के लिए पैसे। इसलिए, ये मानव अलार्म बजाने वाले लोग पूरी रात जागते रहते थे और सुबह 3 बजे ही सड़कों पर निकल आते थे।  

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लंबी छड़ी रखते थे

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वे अपने साथ एक लंबी छड़ी रखते थे जिससे वे लोगों की खिड़कियों पर थपथपाते थे। जब तक अंदर से कोई उन्हें जगाने के लिए आवाज नहीं करता, वे वहां से नहीं जाते थे। लंदन की मैरी स्मिथ जैसी महिलाएं खिड़कियों पर मटर के दाने वाली बंदूक से गोलियां चलाकर लोगों को जगाती थीं।  

मोमबत्ती वाली घड़ियां

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सैकड़ों साल पहले, चीन में लोग समय देखने के लिए मोमबत्ती वाली घड़ियों का इस्तेमाल करते थे। यह विधि बहुत ही अनोखी और वैज्ञानिक थी। वे एक लंबी मोमबत्ती पर एक विशेष निशान लगाते थे और उसमें पीतल की कील गाड़ देते थे। जैसे-जैसे मोमबत्ती जलती और पिघलती, कील नीचे रखी धातु की ट्रे पर गिर जाती थी। ट्रे पर गिरते ही जब कील छन की आवाज करती, तो लोग गहरी नींद से जाग जाते थे.  

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मुर्गे की बांग

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प्राचीन काल में, लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद अलार्म मुर्गे की बांग थी, जो सूर्योदय के समय बांग देता था। यह प्रथा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित है। इसके अलावा, एक अन्य मनोवैज्ञानिक तरीका सोने से पहले खूब पानी पीना था। सुबह तक, मूत्राशय भरा होने के कारण होने वाली बेचैनी उन्हें अपने आप नींद से जगा देती थी।

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लेखक के बारे में

Raghav Tiwari

Raghav Tiwari

राघव तिवारी न्यूज24 में शिफ्ट हेड की भूमिका निभा रहे हैं। यहां टीम प्रबंधन के साथ नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि की खबरें भी कवर करते हैं। इससे पहले ये अमर उजाला, नईदुनिया, नवभारत टाइम्स (NBT) और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में रिपोर्टिंग कर चुके हैं। देवभूमि उत्तराखंड, इंदौर, नोएडा, कानपुर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में काम करने की वजह से राघव भिन्न-भिन्न कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत की समझ रखते हैं। राघव तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी की है। शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Mail ID: raghav.tiwari@bagconvergence.in Contact No. 8840671098
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