नीचे नदी ऊपर पुल और बीच में सड़क, 150 साल पुरानी यह इंजीनियरिंग किसी जादू से नहीं कम

यूं तो आपने देश के कई राज्यों में अनोखे पुलों को देखा होगा लेकिन आज हम जिस पुल की बात करने जा रहे हैं वो सिर्फ अनोखा ही नहीं बल्कि यह इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना भी है.

nadrai ka pul up
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उत्तर प्रदेश में बना नदी के ऊपर नहर

उत्तर प्रदेश में बना नदी के ऊपर नहर2 / 9

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में एक ऐसा अनोखा पुल मौजूद है जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं. इस पुल की सबसे खास बात यह है कि इसके नीचे नदी बहती है, जबकि ऊपर से नहर गुजरती है. इंजीनियरिंग का यह एक अनोखा नमूना है.

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यूपी में कहां स्थित है ये पुल?

यूपी में कहां स्थित है ये पुल?3 / 9

ये अनोखा पुल यूपी के कासगंज जिले में स्थ्ति है, जिसे 'नदरई का पुल' कहा जाता है. स्थानीय लोग इसे 'झाल का पुल' और 'अंग्रेजी पुल' के नाम से भी जानते हैं.

काली नदी पर बना है पुल

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यह ऐतिहासिक पुल आज भी अपनी मजबूत बनावट और अनोखे डिजाइन के कारण लोगों को आकर्षित करता है. मीडिया की खबरों के अनुसार, इस पुल के नीचे काली नदी बहती है जबकि उसके ऊपर से गंगा नहर गुजरती है. नदी और नहर का यह संगम देखने वालों को रोमांचित कर देता है और यहां का नजारा बेहद सुकून देने वाला माना जाता है.

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ब्रिटिश काल में बना था

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नदरई पुल का निर्माण ब्रिटिश शासन के दौरान साल 1885 से 1889 के बीच कराया गया था. हैरानी की बात यह है कि उस समय पुल बनाने में न तो सीमेंट का इस्तेमाल हुआ था और न ही लोहे की सरिया का. इसे चूना, अरहर की दाल का पानी, चना और गुड़ जैसी पारंपरिक सामग्रियों से तैयार किया गया था.

बनने में लगा कितना समय?

बनने में लगा कितना समय?6 / 9

यह पुल करीब चार साल में बनकर तैयार हुआ था, लेकिन इस पुल की मजबूती आज भी लोगों को चौंका देती है. इतने सालों बाद भी पुल से पानी का रिसाव नहीं होता है, जो उस दौर की बेहतरीन इंजीनियरिंग तकनीक का उदाहरण माना जाता है.

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पुल में बने 'चोर अहाते'

पुल में बने 'चोर अहाते'7 / 9

इस पुल की बनावट को और भी ज्यादा खास बनाने के लिए इसके बीच-बीच में छोटे-छोटे अहाते बनाए गए हैं. इन्हें स्थानीय भाषा में 'चोर अहाते' कहा जाता है. माना जाता है कि पुराने समय में लोग इन जगहों का इस्तेमाल छिपने के लिए करते थे. हालांकि ये अहाते सिर्फ छिपने की जगह नहीं थे, बल्कि पुल को अतिरिक्त मजबूती देने के लिए भी बनाए गए थे. यही कारण है कि यह पुल आज भी मजबूती से खड़ा है.

क्यों बनाया गया था ऐसा पुल?

क्यों बनाया गया था ऐसा पुल?8 / 9

दरअसल, जब गंगा नहर का निर्माण किया जा रहा था, तब उसके रास्ते में काली नदी आ रही थी. इंजीनियरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि नहर के पानी को नदी में मिलाए बिना आगे कैसे ले जाया जाए, ताकि सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो. इसके समाधान के तौर पर नदी के ऊपर पुल बनाया गया और उसके ऊपर से नहर निकाली गई.

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दूर-दूर से लोग आते हैं देखने

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आज यह पुल सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग कौशल का शानदार उदाहरण भी माना जाता है. दूर-दूर से लोग इस अनोखी संरचना को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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