Hindus In Iran: ईरान के इस शहर में रहते हैं सबसे ज्यादा हिंदू, संख्या सुन रह जाएंगे दंग

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच रहे युद्ध और तनाव ने पूरी दुनिया का ध्यान मिडिल ईस्ट की ओर खींचा है. जैसे-जैसे ये युद्ध बढ़ रहा है वैसे-वैसे लोगों के मन में भी कई सवाल पैदा हो रहे हैं. दरअसल, सवाल हिंदुओं को लेकर है. बता दें कि ईरान एक मुस्लिम देश है और लोगों के मन में ये सवाल अक्सर उठते हैं कि क्या ईरान में भी हिंदू रहते हैं? तो चलिए आज हम आपको इस सवाल का जवाब देते हैं और बताते हैं कि ईरान के किन शहरों में हिंदुओं की संख्या कितनी है.

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ईरान में कितनी है हिंदुओं की संख्या?

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इस सवाल से जुड़ी कुछ रिपोर्ट्स भी सामने आई हैं. जिसके अनुसार, ईरान में हिंदुओं की संख्या काफी सीमित है. रिपोर्ट में अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं और बताया गया है कि यह संख्या करीब 10,000 से लेकर 40,000 के बीच है जो देश की कुल आबादी का एक बहुत ही छोटा हिस्सा है. इसके अलावा हजारों भारतीय नागरिक भी अलग-अलग कारणों से यहां रहते हैं, जिनमें छात्र, व्यापारी और मजदूर भी शामिल हैं.

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ईरान-भारत के संबंधों की अहम कड़ी

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वहीं, ईरान में ही एक ऐसा क्षेत्र भी है, जहां हिंदू समुदाय अपनी पहचान के साथ मौजूद है. दरअसल, ईरान का तटीय शहर बंदर अब्बास इस मामले में बेहद खास माना जाता है. यहां न सिर्फ सबसे ज्यादा हिंदू रहते हैं, बल्कि उनके धार्मिक और सांस्कृतिक निशान भी आज तक देखे जा सकते हैं. यही वजह है कि यह शहर भारत और ईरान के पुराने संबंधों की एक अहम कड़ी है.

गुजरात और सिंध क्षेत्र के कई व्यापारी ईरान में

गुजरात और सिंध क्षेत्र के कई व्यापारी ईरान में4 / 7

ईरान के दक्षिण में फारस की खाड़ी के किनारे बसा बंदर अब्बास एक बड़ा बंदरगाह शहर है. इतिहास में यह भारत और ईरान के बीच समुद्री व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था. इसी व्यापार के चलते गुजरात और सिंध क्षेत्र में कई व्यापारी आए और यही पर बस गए. समय के साथ उन्होंने यहां अपनी एक छोटी लेकिन मजबूत कम्युनिटी बना ली जो आज भी अपनी परंपराओं को संभाल कर रखे हुए हैं.

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हिंदुओं के लिए बनाए गए मंदिर

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बंदर अब्बास में हिंदू समुदाय के लिए कई मंदिर भी बनाए गए हैं. इसमें सबसे प्रसिद्ध विष्णु मंदिर है, जिसका निर्माण 1892 में भारतीय व्यापारियों ने करवाया था. इस मंदिर की वास्तुकला में भारत और ईरानी शैली का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है.

व्यापारिक रास्तों के पास भी बने थे मंदिर

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इसके अलावा चाबहार जैसे तटीय इलाकों में भी हिंदू मंदिरों के होने की जानकारी मिलती है. कहते हैं कि इन मंदिरों को व्यापार करने वाले रास्तों के आस-पास बनाया गया है. यह मंदिर सिर्फ पूजा के स्थान नहीं थे बल्कि विदेश में बसे भारतीयों के लिए सांस्कृतिक केंद्र की तरह भी काम करते थे.

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तेहरान और इस्फहान में भी मंदिर

तेहरान और इस्फहान में भी मंदिर7 / 7

तेहरान, इस्फहान और जाहेदान जैसे शहरों में भी हिंदू समुदाय के छोटे-छोटे पूजा स्थल होने की भी बात सामने आई है. इन इलाकों में रहने वाले लोग त्योहार और धार्मिक अवसरों पर एक साथ इकट्ठा होते हैं और अपनी परंपराओं की जीवित रखते हैं.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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