Kalava Colours Meaning: शांति, सुरक्षा और सफलता से जुड़ा हाथ में बंधा कलावा, जानें मौली के रंग का असर और महत्व

Kalava Colours Meaning: हिंदू धर्म में पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हाथ में बांधा जाने वाला कलावा या मौली केवल एक धागा नहीं माना जाता। इसे आस्था, रक्षा और शुभ ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। आमतौर पर लोग लाल कलावा बांधते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष के अनुसार अलग-अलग रंगों के कलावे का अपना विशेष महत्व और प्रभाव बताया गया है।

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कलावा बांधने की परंपरा

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कलावा को 'रक्षा सूत्र' भी कहा जाता है। पूजा, यज्ञ या किसी धार्मिक कार्य के समय इसे हाथ में बांधा जाता है। मान्यता है कि यह व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने और जीवन में शुभता लाने का प्रतीक होता है। परंपरा के अनुसार पुरुषों के दाहिने हाथ और महिलाओं के बाएं हाथ में कलावा बांधा जाता है। इसे भगवान की कृपा और सुरक्षा का संकेत माना जाता है।

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लाल कलावा: शक्ति और साहस

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लाल रंग का कलावा सबसे अधिक प्रचलित है। इसे ऊर्जा, साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि लाल कलावा बांधने से मानसिक बल मिलता है और व्यक्ति को चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यह देवी दुर्गा और भगवान हनुमान की कृपा से भी जुड़ा माना जाता है।

पीला कलावा: ज्ञान और गुरु कृपा

पीला कलावा: ज्ञान और गुरु कृपा4 / 10

पीला रंग गुरु ग्रह से जुड़ा माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार पीला कलावा बांधने से ज्ञान, बुद्धि और शुभता में वृद्धि होने की मान्यता है। जो लोग शिक्षा, अध्ययन या आध्यात्मिक कार्यों से जुड़े होते हैं, उनके लिए पीला कलावा विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

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केसरिया कलावा: त्याग और आध्यात्मिकता

केसरिया कलावा: त्याग और आध्यात्मिकता5 / 10

केसरिया रंग पवित्रता, तप और आध्यात्मिक भावना का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्यक्ति में सात्विक विचारों को मजबूत करता है और समाज में सम्मान बढ़ाने का संकेत भी माना जाता है।

काला कलावा: नकारात्मक शक्तियों से रक्षा

काला कलावा: नकारात्मक शक्तियों से रक्षा6 / 10

काले रंग का कलावा अक्सर बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए बांधा जाता है। मान्यता है कि इसे धारण करने से नजर दोष से सुरक्षा मिलती है। कई लोग इसे शनि से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए भी बांधते हैं।

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हरा कलावा: विकास और स्वास्थ्य

हरा कलावा: विकास और स्वास्थ्य7 / 10

हरा रंग समृद्धि, तरक्की और विकास का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष में इसे बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि हरा कलावा बांधने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है और जीवन में आगे बढ़ने के अवसर बढ़ते हैं।

सफेद कलावा: शांति और सकारात्मकता

सफेद कलावा: शांति और सकारात्मकता8 / 10

सफेद रंग पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। सफेद कलावा बांधने से मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता बताई जाती है। इसे चंद्रमा और शुक्र ग्रह की कृपा से भी जोड़ा जाता है।

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नीला कलावा: कर्म और अनुशासन

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नीला रंग धैर्य, अनुशासन और कर्म का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्यक्ति को अपने कार्यों में एकाग्रता और सफलता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कई लोग इसे शनि से जुड़ी सकारात्मक ऊर्जा के लिए भी धारण करते हैं।

पांच रंगों वाला कलावा

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कई बार कलावे में लाल, पीला, हरा, सफेद और नीला या काला रंग एक साथ होते हैं। इसे पंचदेव यानी गणेश, शिव, विष्णु, सूर्य और दुर्गा का आशीर्वाद माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं में इसे शरीर के तीन दोष वात, पित्त और कफ के संतुलन से भी जोड़ा जाता है और धार्मिक अनुष्ठानों में इसका विशेष उपयोग किया जाता है।

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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