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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को विशाखापत्तनम में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) की अध्यक्षता करते हुए भारतीय नौसेना की अजेय शक्ति का निरीक्षण किया. उन्होंने स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस सुमेधा पर सवार होकर बंगाल की खाड़ी में खड़े 70 से ज्यादा युद्धपोतों और पनडुब्बियों की औपचारिक समीक्षा की.

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रिव्यू के दौरान मिग-29के और एलसीए तेजस जैसे 50 से ज्यादा लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों ने नीले आसमान में शानदार फ्लाई-पास्ट कर राष्ट्रपति को सलामी दी. इसी बीच नौसेना के विशेष कमांडो बल 'मार्कोस' ने अपने हैरतअंगेज युद्ध कौशल का प्रदर्शन कर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया.

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इस गौरवशाली आयोजन का मुख्य आकर्षण भारत का स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत रहा, जिसने नौसेना की बढ़ती आत्मनिर्भरता की तस्वीर पेश की. भारत अब तेजी से अपने रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा देश में बने जहाजों और पनडुब्बियों पर खर्च कर खुद को सशक्त बना रहा है.

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इस ऐतिहासिक आयोजन में रूस, ऑस्ट्रेलिया, जापान और यूएई सहित 20 से ज्यादा मित्र देशों के आधुनिक युद्धपोत शामिल हुए. यह केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत की बढ़ती समुद्री कूटनीति और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच साबित हुआ.

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प्रधानमंत्री के 'सागर' विजन के तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार सुरक्षा प्रदाता की भूमिका निभा रहा है. राष्ट्रपति ने नौसेना की सराहना करते हुए कहा कि हमारी सेना समुद्री व्यापार और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और एक भरोसेमंद शक्ति है.

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विशाखापत्तनम की इसी समुद्री सीमा में भारत ने 1971 में पाकिस्तान के पीएनएस गाजी को डुबोया था, इसलिए भारत का यह शक्ति प्रदर्शन पड़ोसी देशों के लिए बड़ा संदेश है. 25 फरवरी तक चलने वाला यह आयोजन भारत के कूटनीतिक प्रभाव और तकनीकी श्रेष्ठता की नई कहानी लिख रहा है.