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अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक हैं. न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि सैन्य रूप से भी अमेरिका के आगे कोई देश नहीं टिक सकता. अपनी इसी ताकत का इस्तेमाल अमेरिका ने कई बार दुश्मनों का खात्मा करने के लिए भी किया. पहले और दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका की ताकत पूरी दुनिया ने देखी. उसके बाद भी आज तक कई देशों को अमेरिकी के आक्रामक रवैये का सामना करना पड़ा है. 1798 से 2026 तक अमेरिका ने करीब 500 बार दूसरे देशों पर हमला किया या किसी न किसी तरीके आक्रामक सैन्य कार्रवाई की. आइए जानते हैं कि 1950 से अब तक अमेरिका ने किस-किस देश पर कब-कब और क्यों हमला किया?

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अमेरिका ने 1953 में ईरान पर डायरेक्ट अटैक तो नहीं किया था, लेकिन ऑपरेशन एजैक्स चलाकर ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग को सत्ता से हटा दिया था. मोसादेग ने ईरान के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था, जो अमेरिकी नजर में सबसे बड़ा अपराध था. इसलिए मोसादेगा की सत्ता का अमेरिका ने तख्तापलट किया और ईरान के तेल तक पश्चिमी देशों की पहुंच संभव बनाई.

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अमेरिका ने 1983 में ग्रेनेडा में भी सैन्य हस्तक्षेप किया था. 'ऑपरेशन अर्जेंट फ्यूरी' चलाकर उन्होंने क्यूबा समर्थित सरकार को सत्ता से हटा दिया था. प्रधानमंत्री मौरिस बिशप की हत्या के जवाब में अमेरिका ने ऑपरेशन के तहत ग्रेनेडा में सैन्य कार्रवाई की और रिवॉल्यूशनरी मिलिट्री काउंसिल के प्रमुख हडसन ऑस्टिन को सत्ता से हटा दिया गया. उनकी जगह निकोलस ब्रैथवेट को अंतरिम सरकार का प्रमुख बना दिया गया था.

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अमेरिका ने 1989 में ऑपरेशन जस्ट कॉज चलाकर पनामा पर सैन्य कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई के तहत अमेरिका ने पनामा के तानाशाह शासक मैन्युएल नोरिएगा को सत्ता से हटा दिया था और पनामा में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों की सिक्योरिटी सुनिश्चित की थी. अमेरिकी सेना ने इतनी कठोर सैन्य कार्रवाई की थी कि नोरिएगा ने खुद आत्मसमर्पण कर दिया था.

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अमेरिका ने 1990 में इराक ने कुवैत पर हमला किया और उस पर कब्जा कर लिया. कुवैत छोटा देश था, लेकिन तेल का भंडार था. 1991 में अमेरिका 'ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म' चलाते हुए इराक पर हमला करके पहला खाड़ी युद्ध शुरू किया. कुवैत की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करने के लिए अमेरिका ने यह हमला किया. सऊदी अरब के तेल भंडार को सुरक्षित करने के लिए हमला किया, यही वजह है कि आज सऊदी अरब भी पूरी दुनिया को तेल सप्लाई कर रहा है.

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अमेरिका ने 1999 में फेडरल रिपब्लिक ऑफ यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति स्लोबोदान मिलोसेविक ने कोसोवो में अल्बानियाई लोगों के खिलाफ एक्शन लिया और उन पर जातीय जुल्म ढहाए. लोगों का दमन होते देखकर 1999 में अमेरिका ने नाटो के साथ मिलकर यूगोस्लाविया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की और कोसोवो को सीधे संयुक्त राष्ट्र के अधीन कर दिया. साल 2003 में यूगोस्लाविया स्टेट यूनियन ऑफ सर्बिया और मोंटेनेग्रो बन गया. साल 2006 में सर्बिया और मोंटेनेग्रो अलग-अलग आजाद देश बन गए. साल 2008 में कोसोवो ने भी खुद को आजाद देश घोषित कर दिया और उसके अमेरिका समेत कई देशों ने मान्यता दी, लेकिन लिस्ट में भारत का नाम नहीं है.

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11 सितंबर 2001 को अमेरिका में ट्विन टॉवर्स पर आतंकी हमला हुआ. इसके बाद अमेरिका ने 2001 में ही अफगानिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम' चलाया और तालिबान समेत आतंकी संगठन अलकायदा के ठिकानों पर हमला किया. तालिबान से मुल्ला उमर की सरकार का पतन किया, लेकिन साल 2021 में तालिबानी सरकार को उखाड़ फेंका.

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अमेरिका ने साल 2003 में दूसरी बार इराक पर हमला किया और दूसरा खाड़ी युद्ध् छेड़ा. 2003 में इराक में अमेरिका ने ऑपरेशन इराकी फ्रीडम चलाया, जिसके तहत तानाशाह सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाया गया. सद्दाम हुसैन ने इराक में कत्लेआम मचा रखा था और सामूहिक विनाश करने के लिए हथियार बना रहा था. 1982 में सद्दाम हुसैन ने दुजैल शहर में अपने 148 विरोधियों को मौत के घाट उतार दिया था. इसी सामूहिक नरसंहार की सजा अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को दी. अमेरिका की अदालत ने नवंबर 2006 में सद्दाम हुसैन को मौत की सजा सुनाई. 30 दिसंबर 2006 को सद्दाम को फांसी दी गई.

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साल 2011 में अमेरिका ने नाटो के साथ मिलकर लीबिया में सैन्य कार्रवाई की और वहां के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को मारकर उसकी सत्ता का पतन किया. लीबिया के पास अफ्रीका का सबसे बड़ा तेल भंडार है. गद्दाफी के पतन के बाद लीबिया में अस्थिरता और अराजकता फैल गई, जिससे देश गृह युद्ध में फंस गया.

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अमेरिका ने साल 2025 में इजरायल की मदद करते हुए ईरान में सैन्य कार्रवाई की. 22 जून 2025 को अमेरिकी सेना ने 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' चलाकर ईरान में 3 न्यूक्लियर प्लांट फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हमला करके भारी नुकसान पहुंचाया.

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अमेरिका ने साल 2026 में वेनेजुएला में ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व चलाकर सैन्य कार्रवाई की और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करके अमेरिका ले गए. अमेरिका ने इस ऑपरेशन को नार्को टेररिज्म के खिलाफ कार्रवाई बताया है. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा 300 बिलियन बैरल से भी ज्यादा का तेल भंडार है.