माइक्रोवेव के गेट में क्या आपने देखे हैं हजारों छोटे-छोटे छेद? सिर्फ डिजाइन नहीं, इसके पीछे है दिलचस्प साइंस

आपने भी माइक्रोवेव के दरवाजे पर बनीं छोटी-छोटी जाली और छेद को जरूर देखा होगा, ये सिर्फ डिजाइन के लिए नहीं होते बल्कि इनके पीछे छिपा है दिलचस्प साइंस. आइए इसे जानते हैं.

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माइक्रोवेव के दरवाजे पर बनी छोटी-छोटी जाली और छेद सिर्फ डिजाइन का हिस्सा नहीं है. इनका काम काफी अहम है. ये छेद आपको अंदर का खाना देखने देते हैं और माइक्रोवेव की वेव्स को बाहर आने से रोकते हैं.

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अंदर का खाना आसानी से दिखता है

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दरवाजे पर बने छोटे छेदों की मदद से माइक्रोवेव के अंदर रखा खाना बाहर से दिखाई देता है. अंदर की रोशनी भी इन छेद बाहर नजर आती है लेकिन माइक्रोवेव की वेव्स बाहर नहीं निकल पातीं.

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माइक्रोवेव की वेवलेंथ होती है बड़ी

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माइक्रोवेव में इस्तेमाल होने वाली वेव की वेवलेंथ दरवाजे की जाली में बने छोटे छेदों से काफी बड़ी होती है. यही वजह है कि माइक्रोवेव की वेव्स इन छेदों से बाहर नहीं निकल पातीं, जबकि रोशनी आसानी से दिखाई देती है.

मेटल की जाली देती है सुरक्षा

मेटल की जाली देती है सुरक्षा4 / 7

माइक्रोवेव के दरवाजे के अंदर लगी मेटल की जाली वेव्स की बाहर जाने से रोकती है और उन्हें अंदर ही सीमित रखती है. इसी वजह से माइक्रोवेव चलते समय भी बाहर खड़े लोगों के लिए सुरक्षित रहता है.

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जाली न हो तो बढ़ सकता है खतरा

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अगर माइक्रोवेव के दरवाजे में ये मेटल की जाली न हो, तो माइक्रोवेव की वेव्स बाहर निकल सकती हैं. ऐसे में मशीन इस्तेमाल सुरक्षित नहीं माना जाएगा. इसलिए दरवाजे की जाली का सही स्थिति में होना जरूरी है.

दरवाजा ठीक से बंद होना जरूरी

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माइक्रोवेव में सुरक्षा के लिए सिस्टम होता है कि दरवाजा पूरी तरह बंद होने के बाद ही मशीन चालू होती है. अगर दरवाजा ठीक से लॉक नहीं होता तो माइक्रोवेव काम नहीं करता. दरवाजा दरवाजा टूटने, जाली खराब होने या कांच में दरार आने पर भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और पहले रिपेयरिंग करवानी चाहिए.

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छोटे छेद करते हैं बड़ा काम

 छोटे छेद करते हैं बड़ा काम7 / 7

लगभग हर कंपनी के माइक्रोवेव में दरवाजे पर मेटल की जाली औ छोटे-छोटे छेद दिए जाते हैं. ये छोटे छेद माइक्रोवेव के अहम सेफ्टी फीचर हैं.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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