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जीवन और मौत के बीच एक बहुत ही धुंधली सी लकीर होती है, लेकिन जो लोग अस्पतालों में ICU में दिन-रात काम करते हैं वे इस सच को किसी भी आम इंसान से ज्यादा करीब से देखते हैं. अमेरिका में फ्लोरिडा की रहने वाली 29 वर्षीय नर्स किर्स्टी रॉबर्ट्स (Kristie Roberts) ने पिछले 4 सालों में अनगिनत लोगों को अफनी आंखों के सामने दम तोड़ते हुए देखा भी है और उन्हें महसूस भी किया है.

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जीवन और मौत के बीच एक बहुत ही धुंधली सी लकीर होती है, लेकिन जो लोग अस्पतालों में ICU में दिन-रात काम करते हैं वे इस सच को किसी भी आम इंसान से ज्यादा करीब से देखते हैं. अमेरिका में फ्लोरिडा की रहने वाली 29 वर्षीय नर्स किर्स्टी रॉबर्ट्स (Kristie Roberts) ने पिछले 4 सालों में अनगिनत लोगों को अफनी आंखों के सामने दम तोड़ते हुए देखा भी है और उन्हें महसूस भी किया है.

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किर्स्टी का दावा है कि मौत की आगोश में समाने से ठीक पहले हर व्यक्ति के व्यवहार में एक आध्यात्मिक बदलाव (Spiritual Shift) आता है जिसे आज तक साइंस भी नहीं समझ पाया है. किर्स्टी ने एक सोशल मीडिया वीडियो के जरिए उन शब्दों का खुलासा किया है, जो लगभग हर मरीज अपने आखिरी वक्त में बोलता है और ये शब्द किसी को भी अंदर तक तोड़ सकते हैं.

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किर्स्टी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीज की हालल चाहे कैसी भी हो, उसके वाइटल्स स्थिर हों या ना हो या फिर डॉक्टर उसे खतरे से बाहर भी क्यों ना बता दें, लेकिन फिर भी मरीज को खुद अपनी मौत का पूर्वाभास हो जाता है. उन्होंने बताया है कि मरने वाला हर व्यक्ति लगभग एक ही बात कहता है, 'कृपया मेरे परिवार को बताना कि मैं उनसे प्यार करता हूं'. 'मुझे पता है कि मैं मरने वाला हूं.' 'मुझे अच्छा महसूस नहीं हो रहा है.'

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चौंकाने वाली बात यह है कि जैसे ही कोई मरीज ये शब्द बोलता है, उसके कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो जाती है. किर्स्टी कहती हैं कि यह एक ऐसी स्थिति है, जहां दवाइयां और टेस्ट फेल हो जाते हैं, क्योंकि आत्मा को शायद विदाई का संकेत पहले ही मिल चुका होता है. किर्स्टी का यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे अब तक 6 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं.

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वे बताती हैं कि उन्होंने चार साल के करियर में कई बार देखा है कि मरीज के शरीर के सभी पैरामीटर्स बिल्कुल सामान्य होते हैं, कुछ भी ऐसा नहीं होता जो जानलेवा दिखे, लेकिन अचानक वह शिफ्ट होता है जिसे शब्द में बयान करना मुश्किल है. अन्य मेडिकल प्रोफेशनल्स ने भी किर्स्टी के इस एक्सपीरियंस का समर्थन किया है.

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एक पूर्व हॉस्पिस नर्स ने कमेंट किया, 'वह बिल्कुल सही कह रही हैं, मरीजों को हमेशा पता होता है.' एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उसके चाचा के वाइटल्स अच्छे थे, फिर भी उन्होंने अपनी ही मौत की सटीक भविष्यवाणी कर दी थी. मृत्यु के साथ इस तरह का सामना करना किर्स्टी के लिए कभी आसान नहीं रहा. वे कहती हैं, मरीजों के साथ गहरा रिश्ता बन जाता है, उनके परिवारों के साथ हम लंबा समय बिताते हैं, इसलिए उन्हें खोना हमेशा दर्दनाक होता है. लेकिन समय के साथ आप इसे वास्तविकता के रूप में स्वीकार करना सीख जाते हैं.

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किर्स्टी का मानना है कि जीवन केवल भौतिक चीजों को इकट्ठा करने के बारे में नहीं है, क्योंकि आखिर में हम सब कुछ यहीं छोड़ कर चले जाते हैं. उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि वे ईश्वर से प्रेम करें, दूसरों की चिंता करें और जो कुछ भी ईश्वर ने उन्हें दिया या उनके पास है उसका आभार जताते रहें, क्योंकि आखिरी समय में केवल प्यार और रिश्ते ही साथ रह जाते हैं.

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो कई बार शरीर के अंग फेल होने से पहले मस्तिष्क को संकेत भेजते हैं, जिससे घबराहट या बेचैनी महसूस हो सकती है. हालांकि, किर्स्टी जिस आध्यात्मिक अनुभव की बात कर रही हैं, वह विज्ञान की समझ से थोड़ा परे है. नर्सों का यह अनुभव बताता है कि मृत्यु केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक गहरा भावनात्मक और रूहानी सफर भी है. किर्स्टी की इस दास्तां ने दुनिया भर के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई इंसान को अपनी विदाई का समय पहले ही महसूस हो जाता है?