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Best Documentary Feature Oscar 2026: अकादमी अवॉर्ड 2026 में कई खास पल देखने को मिले. लेकिन इस बार के ऑस्कर अवॉर्ड्स में एक डॉक्यूमेंट्री ने सबको चौंका दिया. इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है. आइए जानते हैं कि इस डॉक्यूमेंट्री में ऐसा क्या खास था, जिसने अपने नाम ऑस्कर जैसा बड़ा अवार्ड किया.
Oscar 2026, सिनेमा का बड़ा सम्मान

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इस साल 98वां अकादमी अवॉर्ड (Oscars Awards 2026) समारोह आयोजित हुआ. इस दौरान कई खास पल देखने को मिलें. मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच समारोह में सुरक्षा इंतजाम पहले से कई ज्यादा कड़े किए गए थे. इसी बीच फिल्मी जगत के इस सबसे बड़े मंच पर दुनिया में चल रही राजनीति का असर भी दिखा.
डॉक्यूमेंट्री को मिला ऑस्कर

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इस बार के ऑस्कर्स ने हर किसी को चौंका दिया. इस साल डॉक्यूमेंट्री "Mr. Nobody Against Putin" को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर का खिताब मिला. यह फिल्म रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ एक आम आदमी की बहादुरी की कहानी बताती है.
एक स्कूल टीचर की हिम्मत

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फिल्म का मुख्य किरदार पावेल तलंकिन (जिन्हें पाशा कहते हैं) है. वह रूस के एक छोटे से शहर कराबाश में प्राइमरी स्कूल में टीचर और वीडियोग्राफर थे. 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद स्कूलों में बहुत बदलाव आए. सरकार ने बच्चों को राष्ट्रवादी विचार सिखाने शुरू किए.
क्लास में युद्ध के दृश्य

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डॉक्यूमेंट्री में क्लास में युद्ध को जायज ठहराने वाली बातें, झंडा फहराना और यहां तक कि वागनर ग्रुप के सैनिकों द्वारा बच्चों को विस्फोटक के बारे में सिखाना जैसे दृश्य दिखाए गए हैं. पाशा ने चुपके से इन सबकी वीडियो रिकॉर्डिंग की है. उन्होंने सोचा कि दुनिया को यह सच पता चलना चाहिए कि कैसे प्रोपगैंडा (झूठी जानकारी फैलाकर लोगों को भड़काना) बच्चों के दिमाग में डाला जा रहा है.
सजा हो सकने का डर

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पाशा के लिए यह काम बहुत खतरनाक था क्योंकि रूस में ऐसी बातें करने पर सजा हो सकती है. पाशा ने फुटेज को बाहर भेजा और डेनमार्क के डायरेक्टर डेविड बोरेनस्टीन के साथ मिलकर यह डॉक्यूमेंट्री बनाई. इतना रिस्क से भरा काम ही इस डॉक्यूमेंट्री को बाकियों की तुलना में खास बनाती है.
फिल्म में क्या खास था?

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यह डॉक्यूमेंट्री खास इसलिए है क्योंकि यह पहली बार इतने करीब से दिखाती है कि पुतिन का शासन कैसे आम लोगों और बच्चों की जिंदगी बदल रहा है. फिल्म में दिखाया गया कि स्कूल अब सिर्फ पढ़ाई का जगह नहीं, बल्कि युद्ध के लिए बच्चों को तैयार करने का केंद्र बन गए हैं. पाशा खुद को "मिस्टर नोबडी" कहते हैं क्योंकि वे एक आम इंसान थे, लेकिन उनकी हिम्मत ने उन्हें हीरो बना दिया.
BAFTA के बाद ऑस्कर जीता

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फिल्म ने पहले सुंदरलैंड फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड जीता, फिर BAFTA जीता और अब ऑस्कर भी जीत लिया है. डायरेक्टर डेविड ने स्वीकार भाषण में कहा कि यह फिल्म लोकतंत्र के खतरे के बारे में है, न सिर्फ रूस में बल्कि कहीं भी जहां सत्ता मीडिया पर कब्जा कर ले.
कहां देखे ये डॉक्यूमेंट्री?

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यह फिल्म दुनिया को हिला गई क्योंकि यह बताती है कि कैसे एक तानाशाही में सच बोलना कितना मुश्किल है. पाशा अब रूस से बाहर हैं और सुरक्षित जगह पर रहते हैं. फिल्म ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया कि प्रोपगैंडा कितना खतरनाक हो सकता है. इसे आप Amazon Prime Video पर देख सकते हैं. इसके अलावा इसकी 7.5 IMDb रेटिंग है.