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हिंद महासागर में ट्रॉपिकल साइक्लोन होरासियो ने कैटेगरी 5 का रिकॉर्ड तोड़ दर्जा हासिल कर लिया है. इसे 2026 का सबसे बड़ा तूफान बताया गया है. 24 फरवरी को अचानक उभरे इस मॉन्स्टर तूफान की हवाएं 257 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ चुकी हैं. सैटेलाइट तस्वीरों में इसका 'आई ऑफ द स्टॉर्म' साफ नजर आ रहा है, जो वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गया.

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मेडागास्कर के पूर्वी हिस्से में उत्पन्न होरासियो ने 24 घंटों में अपनी तीव्रता दोगुनी कर ली. हवाओं में 35 मील प्रति घंटे से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया, जो अभूतपूर्व है. गर्म समुद्री सतह ने इसे ईंधन प्रदान किया, जिससे यह विशाल रूप धारण कर बैठा.

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257 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान लगाया गया है. इन रफ्तार वाली हवाएं विशाल पेड़ों को जड़ से उखाड़ सकती हैं और इमारतों को चूर-चूर कर सकती हैं. सैटेलाइट से मिली तस्वीरें तूफान के केंद्र की भयावहता दर्शाती हैं. राहत की बात यह है कि यह अभी घने समुद्र के बीचोंबीच घूम रहा है.

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IMD विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि होरासियो भारत, मॉरीशस या अन्य तटीय क्षेत्रों की ओर नहीं बढ़ रहा. यह दक्षिण की ओर ठंडे जल क्षेत्र में जा रहा है, जहां इसकी शक्ति क्षीण पड़ जाएगी. भारतीय तटवर्ती इलाकों को फिलहाल कोई चिंता करने की जरूरत नहीं.

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28°C से ऊपर समुद्री तापमान ने तूफान को अप्रत्याशित ऊर्जा दी है. यूरोपीय सैटेलाइट विशेषज्ञों ने गर्मी के असंतुलन को जिम्मेदार ठहराया. जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान ने तूफानों को अधिक विनाशकारी बना दिया.

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वैज्ञानिक होरासियो को प्रकृति का खतरे का संकेत मान रहे हैं. रिसर्च बताते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग तूफानों की तीव्रता व आवृत्ति बढ़ा रही है. मानवीय गतिविधियां भविष्य के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर रही हैं.

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IMD लगातार सैटेलाइट निगरानी में तूफान पर नजर रखे हुए है. अगले 48 घंटे हिंदी महासागर में काफी कुछ घटित हो सकता है. फिलहाल भारतीय क्षेत्र सुरक्षित हैं, लेकिन अपडेट्स पर नजर रखें. समुद्री यात्राओं पर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

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दो कमजोर पश्चिमी विक्षोभ 26-28 फरवरी व 2-3 मार्च को सक्रिय होंगे. हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बारिश व बर्फबारी संभव है. मैदानी इलाकों में होरासियो का कोई प्रभाव नहीं दिखेगा.

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यह 2026 का सबसे शक्तिशाली तूफान होने से जलवायु विशेषज्ञों में बहस छिड़ गई. सैटेलाइट डेटा से पता चल रहा है कि महासागरों का गर्म होना अब नियमित खतरा बन गया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके अध्ययन से भविष्य की भविष्यवाणी में मदद मिलेगी.

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होरासियो जैसी घटनाएं समय पर कदम उठाने की मांग कर रही हैं. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना अब अनिवार्य हो गया. भारत सहित विश्व को जलवायु संकट से निपटने के लिए एकजुट प्रयास जरूरी हैं.