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दुनिया के सबसे बड़े रेडियो टेलीस्कोप एरे 'अटाकाम लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीटर एरे' (ALMA) का इस्तेमाल करके खगोलविदों ने हमारी अपनी आकाशगंगा यानी मिल्की वे (Milky Way) के बिल्कुल सटीक केंद्र में जाकर कुछ तस्वीरें निकाली हैं. इस रिसर्च के दौरान गैस और धूल के उलझे हुए धागों को भी देखा गया जो अब तक इंसान की नजरों से गायब थे.

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दुनिया के सबसे बड़े रेडियो टेलीस्कोप एरे 'अटाकाम लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीटर एरे' (ALMA) का इस्तेमाल करके खगोलविदों ने हमारी अपनी आकाशगंगा यानी मिल्की वे (Milky Way) के बिल्कुल सटीक केंद्र में जाकर कुछ तस्वीरें निकाली हैं. इस रिसर्च के दौरान गैस और धूल के उलझे हुए धागों को भी देखा गया जो अब तक इंसान की नजरों से गायब थे.

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यह पहली बार है जब सेंट्रल मॉलिक्यूलर जोन (CMZ) के ठंडे गैस के भंडार को इतनी बारीकी से दुनिया के सामने रखा गया है. 650 प्रकाश वर्ष चौड़े इस इलाके की यह तस्वीर एएलएमए (ALMA) द्वारा खींची गई अब तक की सबसे बड़ी और विस्तृत इमेज है. इस खोज का सबसे अहम मकसद यह समझना है कि हमारी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद विशालकाय ब्लैक होल ‘सैजिटेरियस ए स्टार’ के पास सितारे कैसे जन्म लेते हैं और कैसे खत्म होते हैं.

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वहीं, वैज्ञानिकों के अनुसार, मिल्की वे का यह केंद्रीय हिस्सा बेहद खतरनाक और अजीबोगरीब स्थितियों वाला हिस्सा है. यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) की टीम मेंबर एशले बार्न्स ने बताया कि यह जगह हमारी आंखों के लिए अदृश्य है, लेकिन अब इसकी बारीक से भी बारीक जानकारी सामने आ गई है. यह ब्रह्मांड का इकलौता ऐसा गैलेक्टिक केंद्र है जो पृथ्वी के इतना करीब है कि हम उसे इतनी गहराई से देख सकते हैं.

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सेंट्रल मॉलिक्यूलर जोन (CMZ) में ठंडी गैसों का एक जाल बिछा हुआ है जो आपस में टकराकर और सिमटकर भारी मात्रा में धूल के बादल बनाते हैं. इन्हीं बादलों से नए सितारों का जन्म होता है. हालांकि आकाशगंगा के किनारे पर भी तारे बनते हैं, लेकिन केंद्र में यह बहुत ज्यादा आक्रामक और तेज होती है.

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यहां के सितारे इनती जल्दी क्यों मर रहे?
एसीईएस (ACES) प्रोजेक्ट के लीडर स्टीव लॉन्गमोर ने एक चौंकाने वाली बात कही है. उन्होंने बताया कि मिल्की वे के केंद्र में ब्रह्मांड के कुछ सबसे बड़े सितारे मौजूद हैं. ये सितारे बहुत तेजी से अपना जीवन जीते हैं और बहुत जल्दी मर जाते हैं. इनका अंत बहुत ही शक्तिशाली सुपरनोवा या हाइपरनोवा धमाकों के साथ होता है. इन धमाकों से निकलने वाली ऊर्जा पूरे इलाके के माहौल को बदल देती है.

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वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र की परिस्थितियां बिल्कुल वैसी ही हैं, जैसी शुरुआती ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं में रही होंगी. यानी इस तस्वीर को देखकर हम ब्रह्मांड के अतीत की झलक भी देख पा रहे हैं.