मिहिर भोले
नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले देश के पहले गैर-कांग्रेसी राजनेता हैं। उनके व्यक्तित्व के विशाल आभामंडल में लड़े जाने के बावजूद वर्ष 2024 के आम चुनाव ने भाजपा को उम्मीद के विपरीत और बहुमत से कम सीटें दीं। ऐसे में इस अप्रत्याशित नतीजे से एक प्रभावशाली राजनेता के रूप उनकी व्यतिगत साख पर क्या असर पड़ा? मीडिया, राजनैतिक गलियारों और जनसमान्य में इसके कायास लगाये जाने लगे, लेकिन इस विषय को प्रामाणिक और तथ्यात्मक रूप से जानने के लिए देश के प्रख्यात राजनैतिक विश्लेषक, और नवोदय टाइम्स के संपादक अकु श्रीवास्तव की पिछले दिनों प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘मोदी 3.0 और आगे पटरी पर साख’ पढ़ना जरूरी होगा।
पुस्तक में 2024 के चुनावी नतीजों पर पड़े प्रभाव का गहराई से आकलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनैतिक अश्वमेध और उनकी निर्बाध विजय यात्रा पर बतौर राजनैतिक विश्लेषक और संपादक अकु श्रीवास्तव लंबे समय से पैनी नजर रखे हुए हैं। इसके पूर्व उनकी पुस्तक ‘चुनाव 2019 कहानी मोदी 2.0 की’ प्रकाशित हुई थी, जो काफी चर्चा में रही। उनकी नई पुस्तक मोदी की राजनैतिक रणनीति, भाजपा की ताकत और कमजोरी, विपक्षी दलों और और कांग्रेस के के नेतृत्व में बने इंडी संगठन के तमाम हथकंडों मसलन संविधान बदलने का भ्रामक प्रचार, संविधान बदल कर ओबीसी को समाप्त करने के खतरनाक नैरेटिव आदि के 2024 के चुनावी नतीजों पर पड़े प्रभाव का अकु श्रीवास्तव की इस नई पुस्तक में गहराई से आकलन किया गया है।
मोदी के 400 पार का नारा क्यों हुआ फेल, बारीकी से पड़ताल
इस पुस्तक में लेखक ने उन मुख्य कारणों की बारीकी से पड़ताल की है जिसके कारण मोदी के 400 पार का नारा फेल कर गया और जिसने बैठे-बिठाए इंडी गठबंधन और विशेषकर कांग्रेस को मोदी की लोकप्रियता और उनकी साख में अभूतपूर्व ह्रास होने के नए राजनैतिक नरेटिव गढ़ने का मौका दे दिया। अकु अपनी पुस्तक के शुरुआती चैप्टर में ही उन कारणों पर प्रकाश डालते हैं जिससे 2024 के चुनाव में भाजपा की किरकिरी हो गई। उनका मानना है कि जबकि मोदी के 400 पार नारे का उद्देश्य पार्टी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार करना और विपक्ष को सकते में डालना था, लेकिन भाजपा के एक बड़बोले नेता द्वारा इसे संविधान संशोधन से जोड़ने के बयान ने हवा का रुख ही बदल दिया। यह भाजपा की पहली शिकस्त और इंडी गठबंधन की पहली बड़ी सफलता थी, जिसने विपक्ष विशेषकर कांग्रेस को एक नए किंतु निराधार आत्मविश्वास से भर दिया।