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माता-पिता की इस गलती से बच्चा हमेशा रहता है डरा हुआ, दिमागी विकास पर भी पड़ता है असर

Parenting Mistakes To Avoid: माता-पिता अक्सर ही बच्चे की परवरिश में ऐसी कुछ गलतियां कर देते हैं जो बच्चे के वर्तमान ही नहीं बल्कि भविष्य को भी प्रभावित करती हैं. ऐसी ही एक गलती का जिक्र कर रहे हैं पीडियाट्रिशयन. जानिए कहीं आप भी तो नहीं करते यही गलती.

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Bad Parenting Examples: पैरेंट्स की इस गलती से सहम जाते हैं नन्हे-मुन्ने.

Parenting Mistakes: पैरेंट्स अक्सर ही अपने मजे के लिए या बच्चे के साथ मस्ती करते हुए उसे डराने लगते हैं. लेकिन, इस तरह बच्चे को डराना उसके मानसिक विकास पर असर डालता है. बच्चों को इस तरह डराना उनके वर्तमान को ही नहीं बल्कि भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है और इसीलिए पैरेंट्स का इस गलती को पहचानना जरूरी है. इसी बारे में बताते हुए पीडियाट्रिशियन डॉ. रोहित भारद्वाज ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से वीडियो शेयर किया है और बताया है कि बच्चे को डराना माता-पिता की सबसे बड़ी गलती क्यों है.

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बच्चे को क्यों नहीं डराना चाहिए

डॉक्टर का कहना है कि बच्चे को इस तरह डराना फनी नहीं है बल्कि यह उसके ब्रेन की कंडीशनिंग है. बच्चों से यह कहना कि ऐसा करोगे तो डॉक्टर इंजेक्शन लगा देगा, भूत आ जाएगा, कोई बोरे में भरकर ले जाएगा या बाथरूम में लाइट बंद करके तुम्हें बंद कर देंगे, वगैरह भारतीय घरों में नॉर्मल है. लेकिन बड़ों को यह समझना जरूरी है कि बच्चे का दिमाग इन बातों को उस तरह नहीं समझ सकता जैसा वयस्क व्यक्ति का दिमाग समझ सकता है.

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जब भी आप बच्चे को डराते हैं तो उसके शरीर में कोर्टिसोल एकदम से बढ़ जाता है. इससे बच्चे में स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होता है, याद्दाश्त कमजोर पड़ने लगती है, एंजाइटी (Anxiety) होने लगती है और उसका इमोशनल कंट्रोल खत्म होने लगता है. इसके बाद पैरेंट्स पूछते हैं कि यह इतना डरता क्यों है और घबराता क्यों है जबकि गलती माता-पिता की ही होती है.

इस गलती को सुधारना है जरूरी

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बच्चे डर से नहीं बल्कि कनेक्शन से चलते हैं. ऐसे में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही यह आदत कि कुछ भी हो तो बच्चे को डराना शुरू कर दिया, गलत है और इसे बदलने की जरूरत है. आप बच्चे से कोई काम करवाना चाहते हैं या उसे किसी काम को करने से रोकना चाहते हैं तो उसे समझाने की कोशिश करें, लेकिन उसे इस तरह डराएं नहीं. वहीं, अपने मजे और हंसी-मजाक के लिए भी बच्चे को रोज-रोज डराने जैसी गलती ना करें. इससे बच्चे को मानसिक दिक्कतें तो होती ही हैं, भविष्य में बच्चे का सेल्फ कोंफिडेंस भी कम रहने लगता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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