Shiv Ji Temple In Noida: दिल्ली-एनसीआर से कुछ ही दूरी पर मौजूद ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव का प्राचीन भोलेनाथ मंदिर है. यहां पर पूरे साल भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन सावन के महीने में एंट्री के लिए लंबी कतारें मिलती हैं. इस मंदिर को शिव भक्तों की आस्था का केंद्र माना जाता है, हर सोमवार और खासतौर पर खास अवसरों पर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए पहुंचते हैं. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी धार्मिक मान्यताएं और रावण से जुड़ा पौराणिक संबंध है, जो इसे देश के अनोखे शिव मंदिरों में शामिल करता है. 

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क्यों खास है बिसरख का भोलेनाथ मंदिर?

बिसरख गांव का नाम विश्रवा ऋषि के नाम पर पड़ा, जो रावण के पिता थे. कहा जाता है कि इसी जगह पर रावण का जन्म हुआ था और उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. इतिहास के मुताबिक, अष्टभुजाधारी शिवलिंग की स्थापना भी विश्रवा ऋषि ने करवाई थी. 

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अष्टभुजी शिवलिंग है खास वजह 

मंदिर में स्थापित अष्टभुजी शिवलिंग श्रद्धालुओं का केंद्र है. मानना है कि इस शिवलिंग की गहराई आज तक कोई नहीं जान पाया. कई सालों इसकी खुदाई भी कराई गई थी, लेकिन इसका छोर नहीं मिला, जिसकी वजह यह आज भी रहस्य बना हुआ है. 

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सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़

सावन का महीना शुरू होते ही मंदिर में भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और आसपास के इलाकों से कांवड़िये और श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. सावन के हर सोमवार को सुबह दरवाजे खोल दिए जाते हैं और पूरे दिन दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहता है. 

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रावण से जुड़ी अनोखी परंपरा

बिसरख गांव अपनी एक अनूठी परंपरा के लिए भी जाना जाता है. यहां दशहरे के दिन रावण का पुतला नहीं जलाया जाता और सालों से रामलीला का आयोजन भी नहीं होता. गांव के लोग रावण को महान विद्वान और भगवान शिव का परम भक्त मानते हैं. यही वजह है कि यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से काफी अलग पहचान रखता है. 

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कैसे पहुंचें?

बिसरख गांव ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मौजूद है. यहां पर दिल्ली, नोएडा-गाजियाबाद रोड से आसानी से पहुंचा जा सकता है. आप अपनी गाड़ी या कार का इस्तेमाल कर सकते हैं. सावन के सोमवार को अधिक भीड़ होने की वजह सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहता है. 

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