घर को महंगा और स्टाइलिश दिखाना है? पर्दे चुनते समय भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां

Curatin Design Ideas: सही रंग, फैब्रिक, लंबाई और डिजाइन वाले पर्दे आपके घर का पूरा लुक बदल सकते हैं. जानिए पर्दे खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें ताकि आपका घर दिखे ज्यादा एलिगेंट, प्रीमियम और मॉडर्न.

Curtain Ideas For Home

घर का लुक बदल देंगे ये पर्दे.

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Curatin Design Ideas: अपने घर को महंगा लुक देने के लिए लोग उसके फर्नीचर, पेंट और लाइटिंग पर तो खूब ध्यान देते हैं लेकिन अक्सर घर के पर्दों को नजरअंदाज कर देते हैं. सही पर्दे घर के पूरे लुक को बदल देते हैं और कम बजट वाले घर को भी प्रीमियम लुक देते हैं. कई बार महंगे पर्दे लेने के बाद भी कमरे में लुक नहीं आता और इसकी वजह पर्दे का दाम नहीं होता बल्कि उन्हें खरीदते समय की गई छोटी-छोटी गलतियां होती हैं. अगर आप भी नए पर्दे लेने की सोच रहें है तो पहले जान लें पर्दे खरीदते समय की गई ये 7 गलतियां जो आपके घर के लुक को बिगाड़ सकती हैं.

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सिर्फ रंग देखकर पर्दे खरीद लेना

लोग अक्सर पर्दे खरीदते वक्त अपने पसंदीदा रंग के हिसाब से पर्दे ले लेते हैं. लेकिन, पर्दे हमेशा दीवार के रंग, फर्नीचर और कमरे की थीम को ध्यान में रखकर लेने चाहिए. ऐसा करने से कमरा बैलेंस्ड और अक्रैक्टिव दिखेगा.

पर्दों की गलत लंबाई चुनना

ज्यादा छोटे पर्दे खरीदने से हमेशा बचें क्योकि ये आपके कमरे को देखने में छोटा दिखा सकते हैं. पर्दों की सही लेंथ कमरे को ऊंचा और प्रामियम लुक देती है. पर्दे न बहुत छोटे होने चाहिए और न ही बहुत लंबे, वो हमेशा फ्लोर-लेंथ में होने चाहिए. इससे कमरा और भी एलिगेंट लगेगा. पर्दे खरीदने से पहले सही माप जरूर लें.

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गलत फैब्रिक चुनना

हर कमरे के लिए एक ही फैब्रिक का पर्दा सही नहीं होता. हर कमरे का इस्तेमाल अलग होता है बिल्कुल वैसे ही हर कमरे के लिए पर्दे का फैब्रिक भी उसकी जरूरत के हिसाब से होता है, जैसे बेडरूम के लिए ब्लेकआउट पर्दे, लिविंग रूम के लिए लिनेन या कॅाटन फैब्रिक के पर्दे और किचन के लिए हल्के और आसानी से धुलने वाले फैब्रिक के पर्दे बेस्ट रहते हैं.

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बहुत ज्यादा प्रिंट या डिजाइन चुनना

ज्यादा बड़े और भारी प्रिंट के पर्दे हर कमरे में अच्छे नहीं लगते हैं. अगर आपके कमरे में पहले से ही काफी डिजाइन है तो सिपंल पर्दे ही अच्छे लगेंगे. लेकिन, अगर फिर भी आपको प्रिंट वाले पर्दे लेने हैं तो हल्के प्रिंट ही चुनें. इससे कमरा प्रीमियम लगता है.

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Curtain Rod लगाने की ऊंचाई पर ध्यान न देना

कई लोग पर्दे की रॅाड को खिड़की के बिल्कुल ऊपर ही लगा देते हैं. ऐसा करने से खिड़की देखने में छोटी लगती है. रॅाड हमेशा खिड़की से थोड़ा ऊपर लगाएं इससे कमरा देखने में ज्यादा ऊंचा महसूस होता है.

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कमरे की रोशनी को नजरअंदाज करना

कई बार लोग पर्दे चुनते समय कमरे की रोशनी का ध्यान नहीं रखते. बहुत मोटे पर्दे कमरे में लगाने से कमरे में और भी अंधेरा महसूस होता है. वहीं, हल्के रंग के पर्दे ज्यादा रोशनी आने देते हैं जिससे कमरा देखने में बड़ा लगता है. जहां जरूरत हो सिर्फ वहीं डार्क पर्दे लगाएं.

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सिर्फ ट्रेंड देखकर खरीदारी करना

ज्यादातर लोग सोशल मीडिया के ट्रेंड के हिसाब से पर्दे खरीद लेते हैं, पर जरूरी नहीं कि जो सोशल मीडिया पर अच्छा लग रहा हो वो असल में घर में भी अच्छा ही लगे. ट्रेंड को फॅालो करने से ज्यादा जरूरी प्रैक्टिकल होना है. इसलिए अपने कमरे के साइज और जरूरत के हिसाब से ही पर्दे लें.

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पर्दे खरीदते समय इन बातों का भी रखें ध्यान

ऐसे पर्दे खरीदें जिन्हें धोना आसान हो, बहुत ही भड़काउ डिजाइन खरीदने से बचें. पर्दे लेने से पहले उनकी सिलाई भी चैक करें की सिलाई सही ढंग से हुई है या नहीं. इसपर भी ध्यान दें कि पर्दे के हुक और रिंग्स मजबूत हैं या नहीं. पर्दे ऐसे लें जो बेसिक और एवरग्रीन डिजाइन के हों.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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