उत्तर कश्मीर के गुलमर्ग में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब रोपवे के अचानक रुक जाने से करीब 300 पर्यटक हवा में फंस गए. आनन-फानन में भारतीय सेना के जवानों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, जिसके बाद कई लोगों को संकट की घड़ी में बचाया जा सका है. गुलमर्ग में स्थित ये रोपवे हाई‑अल्टीट्यूड मेदां और स्की ढलानों तक यात्रियों को ले जाती है, अचानक बंद हो जाने से कई केबिनों में सवार लोग ऊबड़‑खाबड़ इलाके के ऊपर लटकते रह गए. घटना के मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि कई यात्री, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी थे, उनमें अफरा-तफरी फैल गई और डर की स्थिति पैदा हो गई.
कैसे काम करता है रोपवे या केबल कार?
घटना ने फिर से यह सवाल उठाया है कि रोपवे जिसे केबल कार भी कहा जाता है आखिर वो कैसे काम करता है? एक सवाल ये भी खड़ा हो गया है कि गुलमर्ग के रोपवे में खराबी किस वजह से आई? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रोपवे सिस्टम में भारी स्टील केबल, केबिन (ट्रॉली), टॉप-लोअर स्टेशन और ड्राइव-ब्रेकिंग यूनिट सबसे जरूर होते हैं. केबलें स्टेशनों के बीच फैली रहती हैं और केबिन्स विशेष क्लैम्प या ग्रिप्स के माध्यम से केबल से जुड़े होते हैं.
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बिना इंजन चलता है ये 'उड़न खटोला'
आपको जानकर हैरानी होगी कि सिस्टम का संचालन इलेक्ट्रिक मोटर द्वारा नियंत्रित ड्राइव शाफ्ट से होता है, जबकि गुरुत्वाकर्षण और संतुलन तंत्र (काउंटरोवेट या प्रतिलोड) चालकतंत्र के स्थिरपन में मदद करते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार रोपवे में तकनीकी गड़बड़ी कई कारणों से हो सकती है, मोटर या गियरबॉक्स में खराबी, ब्रेकिंग सिस्टम का फेल होना, केबल में फ्रिक्शन, नियंत्रण प्रणाली में सॉफ्टवेयर ग्लिच या ह्यूमन फॉल्ट से हो सकती है.
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गुलमर्ग में कैसे खराब हुआ रोपवे?
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि गुलमर्ग रोपवे के संचालन कर्मचारियों और इंजीनियर्स द्वारा तकनीकी कारणों की त्वरित जांच की जा रही है और विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर सार्वजनिक किया जाएगा. शुरुआती जांच में रोपवे का अचानक रुकना तकनीकी खराबी बताई जा रही है. घटना की जानकारी मिलते ही फौरन सेना की 9 राजपूताना राइफल्स, जम्मू‑कश्मीर पुलिस और स्थानीय सिविल प्रशासन की राहत‑बचाव टीमें घटनास्थल पर पहुंची और निकासी का काम शुरू कर दिया.
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