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मुगल काल में किसे मिलती थी सबसे ज्यादा सैलरी? जानें एक साधारण सिपाही की कितनी थी तनख्वाह

मुगल शासन में सैलरी सिस्टम काफी व्यवस्थित थी. सबसे ज्यादा वेतन शाही परिवार और ऊंचे दर्जे के मनसबदारों को मिलता था, जबकि आम सिपाहियों को तय वेतन दिया जाता था. आइए जानते हैं उस दौर की सैलरी व्यवस्था कैसी थी.

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Credit: AI

भारत के इतिहास में मुगल साम्राज्य अपनी मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और विशाल सेना के लिए जाना जाता है. उस समय सेना और प्रशासन को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए एक खास व्यवस्था बनाई गई थी, जिसे मनसबदारी प्रणाली कहा जाता था. इसी सिस्टम के आधार पर अधिकारियों, सैनिकों का पद और वेतन तय किया जाता था. मुगल काल में सबसे ज्यादा वेतन शाही परिवार के राजकुमारों और उच्च श्रेणी के मनसबदारों को मिलता था. मनसबदारों की रैंक उनके ‘ज़ात’ और ‘सवार’ के आधार पर तय होती थी. ‘ज़ात’ उनके व्यक्तिगत पद और वेतन को दर्शाती थी, जबकि ‘सवार’ ये बताता था कि उनके अधीन कितने घुड़सवार सैनिक रहने चाहिए. जितनी ऊंची रैंक होती थी, उतना ही ज्यादा वेतन और सम्मान मिलता था.

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क्या था खास?

इतिहासकारों के मुताबिक, सम्राट अकबर के शासनकाल में मनसबदारों की कई श्रेणियां थीं. सबसे ऊंचे दर्जे के मनसबदारों को सालाना लाखों रुपये के बराबर सैलरी मिलती थी. कई अधिकारियों को नकद वेतन देने के बजाय जागीर भी दी जाती थी, जिससे वो किसी क्षेत्र से राजस्व ले सकें. यही वजह थी कि बड़े मनसबदार आर्थिक रूप से बेहद संपन्न माने जाते थे. अगर सामान्य सैनिकों की बात करें तो उनकी आय मनसबदारों की तुलना में काफी कम होती थी. उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, एक साधारण घुड़सवार सैनिक को लगभग 200 रुपये सालाना वेतन मिलता था. हालांकि ये राशि सैनिक की जिम्मेदारी, घोड़ों की संख्या और सेवा की प्रकृति के मुताबिक बदल भी सकती थी.

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क्या है मनसबदारी?

कई बार सैनिकों को पूरे साल का वेतन भी नहीं मिलता था और भुगतान सेवा अवधि के हिसाब से किया जाता था. मुगल प्रशासन में वेतन का मकसद सिर्फ कर्मचारियों को भुगतान करना नहीं था, बल्कि सेना को मजबूत बनाए रखना और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी था. इसी वजह से मनसबदारों को अपने अधीन सैनिकों और घोड़ों का रखरखाव भी खुद करना पड़ता था. अगर कोई अधिकारी तय संख्या में सैनिक नहीं रखता था, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती थी. इतिहासकार मानते हैं कि मुगल साम्राज्य की सफलता में उसकी संगठित वेतन और प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी भूमिका थी. इसी व्यवस्था ने लंबे समय तक साम्राज्य की सेना और शासन को मजबूत बनाए रखा. हालांकि समय के साथ आर्थिक चुनौतियों और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण ये व्यवस्था कमजोर पड़ती गई, लेकिन मनसबदारी प्रणाली आज भी भारतीय इतिहास की सबसे दमदार प्रशासनिक व्यवस्थाओं में गिनी जाती है.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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