हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: DiwaliIndia blocGyanesh KumarBigg Boss 20

क्या स्टिंग ऑपरेशन करना भारत में है कानूनी, अभिव्यक्ति की आजादी पर क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट? जानें पूरी डिटेल

साल 2009 में आरके आनंद बनाम दिल्ली हाईकोर्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम स्टिंग ऑपरेशन को बड़े जनहित में किया गया पत्रकारिता का प्रयास माना था. यह मामला चर्चित बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन केस से जुड़ा था.

विज्ञापन
क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में किसी को चोरी छिपे रिकॉर्ड करना क्या कानूनी है? (Photo: AI/ANI)

दक्षिण भारत की राजनीति में इन दिनों स्टिंग ऑपरेशन का मुद्दा दिल्ली तक गरमाया हुआ है. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने दावा किया कि उन्हें निशाना बनाते हुए उनका स्टिंग ऑपरेशन किया गया. अब इस मामले में कर्नाटक पुलिस ने भी बड़ा खुलासा किया है. बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने दावा किया कि स्टिंग ऑपरेशन में कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन नई दिल्ली में खरीदा गया था. स्टिंग ऑपरेशन को लेकर जारी राजनीति के बीच क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में किसी को चोरी छिपे रिकॉर्ड करना क्या कानूनी है?

स्टिंग ऑपरेशन क्या होता है?

स्टिंग ऑपरेशन को अक्सर भ्रष्टाचार, राजनीतिक अनियमितताओं और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की कथित गड़बड़ियों को उजागर करने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है. लेकिन किसी व्यक्ति की जानकारी या सहमति के बिना उसका वीडियो बनाना क्या कानूनन सही है? क्या पत्रकारिता के नाम पर किसी की निजी बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है? आपको बता दें कि भारत में स्टिंग ऑपरेशन को लेकर कोई एक अलग कानून नहीं है, लेकिन इसकी वैधता कई कानूनी प्रावधानों, निजता के अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी से तय होती है.

यह भी पढ़ें: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, कहा- SIR पर फैसले सर्वसम्मति से हुए

विज्ञापन

दरअसल, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी देता है. इसमें प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है. हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है. संविधान का अनुच्छेद 19(2) सार्वजनिक व्यवस्था, मानहानि, शालीनता और अन्य निर्धारित आधारों पर इस स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है.

स्टिंग ऑपरेशन पर क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट?

भारत में किसी व्यक्ति की जानकारी या सहमति के बिना उसका वीडियो रिकॉर्ड करना हर स्थिति में अपराध नहीं है. अगर किसी स्टिंग ऑपरेशन का उद्देश्य भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी या जनहित से जुड़े किसी गंभीर मामले को उजागर करना है, तो सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में संरक्षण मिल सकता है. लेकिन इसके लिए उद्देश्य उचित होना चाहिए. दूसरी ओर, किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल देना, झूठे आरोप गढ़ना, वीडियो से छेड़छाड़ करना या किसी को अपराध करने के लिए उकसाना कानूनी मुश्किलें पैदा कर सकता है.

विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत सरकार मामले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना था. यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है. हालांकि, निजता का अधिकार भी पूर्ण नहीं है और परिस्थितियों के आधार पर इसका संतुलन दूसरे अधिकारों के साथ किया जाता है.

यह भी पढ़े: ‘पता बदलने पर वोटर दोबारा फॉर्म 6 क्यों भरे?’, चुनाव आयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोले- वैधता पर फैसला बाकी

विज्ञापन

स्टिंग ऑपरेशन पर सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला है?

साल 2009 में आरके आनंद बनाम दिल्ली हाईकोर्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम स्टिंग ऑपरेशन को बड़े जनहित में किया गया पत्रकारिता का प्रयास माना था. यह मामला चर्चित बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन केस से जुड़ा था. एक न्यूज चैनल ने स्टिंग के जरिए गवाह को प्रभावित करने की कोशिश का खुलासा किया था. अदालत ने माना कि इस खुलासे से न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश सामने आई. साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्टिंग ऑपरेशन के नाम पर मीडिया को मनमानी करने की छूट नहीं दी जा सकती.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola