भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक माना जाता है, जहां हर दिन करोड़ों यात्री सफर करते हैं. लंबी दूरी की यात्रा के दौरान लोग घंटों तक ट्रेन की सीटों पर बैठे रहते हैं. अगर आपने कभी ट्रेन में सफर किया होगा, तो एक बात जरूर नोटिस की होगी कि ज्यादातर सीटें नीले या हल्के नीले रंग की दिखाई देती हैं. कई लोगों को लगता है कि यह सिर्फ डिजाइन या सजावट का हिस्सा है, लेकिन इसके पीछे कुछ खास वजहें भी जुड़ी हुई हैं. रेलवे सीटों का रंग चुनते समय यात्रियों की सुविधा, सफाई और लंबे समय तक उपयोग जैसी कई बातों का ध्यान रखा जाता है. यही कारण है कि सालों से भारतीय रेलवे में नीले रंग को सबसे ज्यादा जोर देता है.

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आराम और शांति से भी जुड़ा है जवाब

विशेषज्ञों के अनुसार नीला रंग दिमाग को शांत और आरामदायक महसूस कराने वाला माना जाता है. ट्रेन में सफर के दौरान लोग कई घंटों तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, इसलिए ऐसा रंग चुना जाता है जो आंखों पर ज्यादा असर न डाले. चमकीले या गहरे रंग लंबे समय तक देखने पर थकान और बेचैनी बढ़ा सकते हैं, जबकि नीला रंग मानसिक रूप से सुकून देने वाला माना जाता है. यही वजह है कि अस्पताल, ऑफिस और कई सार्वजनिक स्थानों पर भी नीले रंग का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है.

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यह सबसे बड़ा कारण

भारतीय रेलवे में हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं. इतने ज्यादा इस्तेमाल की वजह से सीटों पर धूल, मिट्टी और खाने-पीने के दाग लगना आम बात है. अगर सीटों का रंग सफेद या बहुत हल्का होता, तो छोटी सी गंदगी भी तुरंत दिखाई देने लगती. वहीं नीले रंग पर दाग और धूल अपेक्षाकृत कम नजर आते हैं, जिससे सीटें लंबे समय तक साफ और ठीक दिखाई देती हैं. यही कारण है कि रेलवे के लिए यह रंग काफी व्यावहारिक माना जाता है. इसके अलावा नीला रंग जल्दी फीका भी नहीं पड़ता, जिससे बार-बार सीट कवर बदलने की जरूरत कम पड़ती है और रखरखाव का खर्च भी कम लगता है.

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