Adani Ports and Special Economic Zone ने NMDC और Vale के साथ किया बड़ा समझौता

अडानी पोर्ट्स ने NMDC और Vale के साथ गंगावरम पोर्ट पर आयरन ओर ब्लेंडिंग सुविधा और विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित करने के लिए समझौता किया.
इस परियोजना से पोर्ट की क्षमता 75 MMT तक बढ़ेगी और भारत को वैश्विक आयरन ओर व्यापार में नई मजबूती मिलेगी.

Adani Ports and Special Economic Zone ने NMDC और Vale के साथ किया बड़ा समझौता

Mr. Gustavo Primemta - President and CEO, Vale S.A.; Mr. Amitava Mukherjee Chairman-cum-Managing Director NMDC; Mr. Pranav Choudhary - CEO Ports, Adani Ports.

Adani Ports and Special Economic Zone (APSEZ) ने अपनी सहायक कंपनी Adani Gangavaram Port Limited (AGPL) के माध्यम से NMDC Limited और ब्राज़ील की कंपनी Vale S.A. के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.

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यह समझौता नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-ब्राज़ील बिज़नेस फोरम समिट के दौरान हुआ. यह समझौता ब्राज़ील के राष्ट्रपति Luiz Inácio Lula da Silva की भारत यात्रा के दौरान और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal की उपस्थिति में हुआ, जो भारत-ब्राज़ील के मजबूत होते रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है.

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इस समझौते के तहत गंगावरम पोर्ट पर आयरन ओर (लौह अयस्क) ब्लेंडिंग सुविधा और एक समर्पित विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) विकसित किया जाएगा. इस सहयोग के तहत कंपनियां मिलकर एक एकीकृत SEZ इकोसिस्टम तैयार करेंगी, जहां आयरन ओर की ब्लेंडिंग, वैल्यू एडिशन और व्यापारिक गतिविधियां संचालित होंगी.

इस पहल का उद्देश्य भारत के पूर्वी तट पर आयरन ओर निर्यात श्रृंखला को मजबूत करना और खनिज प्रसंस्करण व व्यापार में वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है. इस विकास के बाद गंगावरम पोर्ट की क्षमता बढ़कर 75 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) तक पहुंच जाएगी और यह भारत तथा क्षेत्र के लिए आयरन ओर निर्यात का प्रमुख केंद्र बन जाएगा.

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APSEZ के पूर्णकालिक निदेशक एवं सीईओ अश्विनी गुप्ता ने कहा कि यह साझेदारी भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने और भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

इस परियोजना के तहत गंगावरम पोर्ट में पूरी तरह मशीनीकृत बर्थिंग और कार्गो हैंडलिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जो दुनिया के सबसे बड़े अयस्क वाहक जहाजों (Valemax vessels) को संभालने में सक्षम होंगी. इन जहाजों की क्षमता 4 लाख मीट्रिक टन तक होती है.

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इसके अलावा, यार्ड प्रबंधन, ब्लेंडिंग ऑपरेशन, जहाजों की लोडिंग और अनलोडिंग की आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे सप्लाई चेन की दक्षता बढ़ेगी.

यह साझेदारी गंगावरम पोर्ट को वैश्विक आयरन ओर व्यापार के एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करेगी और भारत को एक प्रतिस्पर्धी एवं आधुनिक समुद्री हब बनाने में मदद करेगी.

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