पेपर लीक के विरोध में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च किया. इस दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे. हालांकि दिल्ली पुलिस की हिंसक और दमनकारी कार्रवाई की पूरे देश में निंदा हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन लोकुर ने पुलिसकर्मियों की वर्दी और नेमप्लेट को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पुलिस और छात्रों की झड़प के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें कई पुलिसकर्मी बिना नेमप्लेट और सिविल ड्रेस में छात्रों पर लाठी भांजते नजर आए, जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन है.

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पुलिस वालों की वर्दी पर नेमप्लेट होना अनिवार्य

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(1)(a) के तहत ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की वर्दी पर उनके नाम और पद वाली नेमप्लेट जरूर होनी चाहिए. नेमप्लेट भी साफ-साफ और स्पष्ट होनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो यह पुलिस विभाग के नियमों और प्रोटोकॉल का उल्लंघन होगा. अगर कोई पुलिसकर्मी ड्यूटी पर रहते हुए बिना नेमप्लेट वाली वर्दी में है और कार्रवाई करता है तो नागरिक उसका नाम और पद पूछ सकते हैं. वरिष्ठ अधिकारियों या संबंधित थाने में लिखित शिकायत दे सकते हैं. नागरिक मानवाधिकार आयोग (NHRC) या उच्च न्यायालय में भी लिखित शिकायत दे सकते हैं. क्योंकि नेमप्लेट हटाने पर गलत कार्रवाई, दुर्व्यवहार और लाठीचार्ज के मामलों में आरोपी पुलिसकर्मी की पहचान मुश्किल होगी.

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