पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद दोफाड़ हुई ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. TMC नेता कुणाल घोष ने बागी गुट को लेकर बड़ा चौंकाने वाला दावा करके सियासी पारा फिर चढ़ा दिया है. कुणाल घोष कहते हैं कि बागी हुए 6 सांसद और बागी हुए आधे से ज्यादा विधायक वापसी करना चाहते हैं और इसके लिए वे ममता बनर्जी के संपर्क में हैं. वापसी की इच्छा रखने वाले नेताओं का नाम नहीं बताऊंगा, लेकिन इतना कह सकता हूं कि बागी सांसदों और विधायकों को वापस लौटने से रोकने के हरसंभव प्रयास भी किए जा रहे हैं.
पार्टी प्रमुख की रजामंदी पर निर्भर करेगी वापसी
ऐसे में यहां सवाल उठता है कि अगर किसी भी राजनीतिक दल के सांसद या विधायक बागी होते हैं तो क्या वे पार्टी में वापसी कर सकते हैं? इसका जवाब यह है कि हां बागी सांसद और विधायक वापसी कर सकते हैं. राजनीति में दल-बदलुओं के लिए रास्ते हमेशा खुले रहते हैं, बशर्ते पार्टी हाईकमान उन्हें स्वीकार करने के लिए राजी हो. लेकिन अगर बागी सांसद और विधायक वापसी करना चाहें तो उन्हें वापस लेना है या नहीं लेना है, यह उस पार्टी के प्रमुख की रजामंदी पर निर्भर करेगा कि वह उन्हें माफ करेंगे या नहीं. ऐसे में बागियों की वापसी का फैसला ममता बनर्जी लेंगी.
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पार्टी की रजामंदी: बागी नेताओं की घर वापसी पूरी तरह से उस राजनीतिक दल और उसके प्रमुख नेताओं के निर्णय पर निर्भर करती है कि वे उन्हें माफ करके दोबारा पार्टी में शामिल करना चाहते हैं या नहीं.
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कानूनी और अयोग्यता मामले: यदि पार्टी ने बागी नेताओं की सदस्यता रद्द कराने के लिए स्पीकर के पास अयोग्यता याचिकाएं दी हैं, तो पार्टी नेतृत्व चाहे तो वापसी के बाद उन कानूनी याचिकाओं को वापस भी ले सकता है.
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राजनीतिक शर्तें: कई बार दल अपनी शर्तों या आंतरिक समझौते के तहत बागीधड़े के नेताओं को वापस लेते हैं.
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विधानसभा/लोकसभा अध्यक्ष का अधिकार
बागी सांसदों या विधायकों की सदस्यता रद्द करने या उन्हें अयोग्य घोषित करने का अंतिम फैसला सदन के अध्यक्ष (Speaker या Chairman) के पास होता है. यदि बागी नेता वापस लौट आते हैं और पार्टी अपनी तरफ से दी गई अयोग्यता की शिकायत या याचिका को वापस ले लेती है, तो स्पीकर उस मामले को बंद कर देते हैं.
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पार्टी नेतृत्व की रजामंदी
कानून से इतर व्यावहारिक नियम यह है कि वापसी के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व (High Command) की मंजूरी सबसे जरूरी होती है. पार्टी तय करती है कि वापस आने वाले नेताओं को पुराने पदों पर बहाल किया जाएगा या उन्हें साधारण कार्यकर्ता के रूप में काम करना होगा. हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी धड़े को लेकर भी ऐसे ही राजनीतिक और कानूनी समीकरणों की चर्चाएं सुर्खियों में रही हैं.