दिल्ली पुलिस और उत्तराखंड पुलिस तथा केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी तत्वों द्वारा संभावित बड़े आतंकी हमले की सूचना के बाद अलर्ट जारी कर दिया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार खुफिया रिपोर्ट और प्राप्त खतरे वाले ईमेल में कई धार्मिक स्थलों, सरकारी कार्यालयों और राजनीतिक हस्तियों को संभावित टार्गेट बताया गया है, जिसके आधार पर दिल्ली और उत्तराखंड में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. अधिकारियों ने बताया कि खतरे में मुख्य रूप से उत्तराखंड और दिल्ली के मंदिर, रेलवे स्टेशन, सरकारी संस्थान शामिल हैं.
खुफिया विभाग का दिल्ली-उत्तराखंड को अलर्ट
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया विभाग ने दोनों राज्यों के साथ नजदीकी क्षेत्रों में भी सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है. दिल्ली पुलिस फिलहाल इन ईमेलों की सत्यता और स्रोत की जांच कर रही है और आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में उत्तराखंड के निहंग सिखों और राज्य पुलिस के बीच बरती गई तनातनी को भी खतरे के मद्देनजर देखा जा रहा है. जानकारी के मुताबिक 16 जून को चमोली के कर्णप्रयाग में लौट रहे निहंग तीर्थयात्रियों और स्थानीय व्यापारियों के बीच हुई झड़प के बाद चार निहंगों के नाम से एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी हुई थी.
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गिरफ्तार निहंगों की रिहाई की मांग
इसके बाद निहंग समूहों ने अपना विरोध जताते हुए विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन और गद्दी-प्रदर्शन किए. 20 जून को एक समूह ने रुद्रप्रयाग जिले के नगरासु स्थित गुरुद्वारे पर कब्जा कर ध्यान किया और 23 जून को वहां से हटे. इसके बाद 25 जून को बड़े समूह ने देहरादून की ओर मार्च किया और गिरफ्तार निहंगों की रिहाई की मांग दोहराई. उत्तराखंड पुलिस और समुदाय के नेताओं के बीच चल रही मध्यस्थता के बाद तनाव फिलहाल कम हुआ है, अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और शिकायतों का संज्ञान लिया जा रहा है.
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पुलिस और खुफिया एजेंसियां संदिग्धों पर निगरानी बढ़ा रही हैं और सार्वजनिक स्थानों पर चेकिंग, अवरोध तथा विशेष पेट्रोलिंग की हिदायत दी गई है. रेलवे विभाग व मंदिर प्रबंधनों को भी सुचना देकर सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध ईमेल, संदेश या व्यक्ति के बारे में तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें और अफवाहों से बचें.
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