इंडियन एयरफोर्स अपनी हवाई ताकत में लगातार इजाफा करने में जुटी हुई है. इसी सिलसिले में भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में R-37 मिसाइल जो कि हवा-से-हवा में ही मार गिराने में अपनी ताकत रखती है और इसका इस्तेमाल Su-30MKI लड़ाकू विमानों के जरिए किया जाएगा. इसे खरीदने के लिये रूस से रक्षा स्तर पर बातचीत शुरू हो चुकी है.
इंडियन एयरफोर्स के एक अधिकारी ने न्यूज24 को जानकारी देते हुए बताया कि ऑपेरशन सिंदूर के समय हवाई हमला लंबी दूरी के मिसाइल खतरों से बचने के लिए Very Long Range Air-to-Air क्षमता को और मजबूत करने पर काम कर रही है.
भारतीय वायुसेना के अधिकारी ने न्यूज24 को यह भी बताया कि रूस से यह डील होने के बाद भविस्य में R-37 मिसाइल का निर्माण आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी तरीके से किया जाएगा.
रिटायर्ड मेजर जनरल एसके सिंह के मुताबिक यह लंबी दूरी की मिसाइल है. यह 200 किलोमीटर तक अटैक कर सकती है. यह खास तौर पर AWACS, एयर-टैंकर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान और स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक प्लेटफॉर्म जैसे हाई-वैल्यू टारगेट को मार गिराने के लिए बनाई गई है.
वायुसेना सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल अभी करीब 300 R-37 मिसाइलों को खरीदने पर प्लान चल रहा है. आपको बता दें कि ऑपेरशन सिंदूर के बाद भारतीय वायुसेना लगातार नीति और रणनीति पर खासा बदलाव कर रही है और इसी बदलाव का परिणाम है R-37 मिसाइल.










