Supreme Court on Manipur: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 17 सितंबर 2026 को मणिपुर में राहत शिविरों में रह रहे अंदरूनी तौर पर विस्थापित लोगों की मौतों पर चिंता जताई और राज्य के मुख्य सचिव को इन मामलों की जांच के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताने का निर्देश दिया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे, ने जस्टिस गीता मित्तल समिति की तरफ से कैंप में हुई मौतों (जिनमें संदिग्ध असामान्य मौतें भी शामिल हैं) के बारे में जानकारी देने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए.
कोर्ट ने उठाए सवाल
बेंच ने मुख्य सचिव को मौतों, खासकर असामान्य मौतों के रूप में क्लासिफाइड मौतों की डिटेल देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया. कोर्ट ने रिपोर्ट की गई 34 मौतों में से सिर्फ 20 मामलों में पोस्टमार्टम किए जाने के कारण के बारे में भी क्लेरिफिकेशन मांगा.
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मुआवजे को लेकर भी नाराजगी
कोर्ट ने ये भी सवाल किया कि रिलीफ कैंप में असामान्य मौतों का शिकार हुए IDPs के परिवारों को सिर्फ 20000 रुपये से लेकर 30000 रुपये का मुआवज़ा क्यों मिला. मणिपुर स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (MSLSA) से एक अलग स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी असामान्य मौतों के मामलों में एफआईआर दर्ज की जाए और जांच जल्द पूरी की जाए.
MSLSA से ये भी कहा गया कि वो राहत शिविरों में रह रहे लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करे. ये निर्देश जस्टिस मित्तल समिति और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट की कोर्ट द्वारा समीक्षा के बाद दिए गए, जिनमें कैंप्स में 30 से ज़्यादा मौतों का ज़िक्र था. एक मामले में कथित यौन उत्पीड़न का भी जिक्र था.
CBI, SIT जांच की क्या है स्थिति?
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि CBI ने 31 मामलों की जांच की है और 28 में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की है, जबकि 3 मामलों में जांच अभी बाकी है. राज्य पुलिस की SIT ने 3020 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 302 में चार्जशीट दाखिल की गई है. 1583 मामलों में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की गई, जबकि 1135 मामलों में जांच चल रही है. 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुके हैं.
कोर्ट ने ये उम्मीद भी जताई कि 2023 की मणिपुर हिंसा से जुड़े CBI और NIA मामलों को देख रही 2 विशेष अदालतें तेजी से ट्रायल पूरा करेंगी. 3 मई 2023 को जातीय हिंसा शुरू हुई, जिसमें 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग विस्थापित हो गए.
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