सुप्रीम कोर्ट ने तलाक से जुड़े मामलों में बेहद अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका का निपटारा करते हुए जजमेंट दिया कि आपसी सहमति से तलाक होने के बाद पति या पत्नी में से कोई भी सहमति से पीछे नहीं हट सकता। मामलों में अंतिम डिक्री होने से पहले दोनों पक्षों मे से कोई पीछे हटना चाहते तो हट सकता है, यानी अपनी सहमति वापस ले सकता है, लेकिन अगर कानूनी और कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद पीछे हटना चाहते हैं तो ऐसा संभव नहीं हो पाएगा।

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23 साल बाद दायर किया था डिवोर्स केस

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंडल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने जजमें सुनाते हुए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। याचिकाकर्ता के द्वार समझौते से पीछे हटने पर कड़ी नाराजगी जताई। दरअसल, साल 2000 में शादी हुई और 23 साल बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दायर की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजा, जहां काउंसिलिंग के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक लेने और आपसी सहमति से विवादों का निपटारा करने का फैसला किया।

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आपसी सहमति से लिया था दोनों ने तलाक

बता दें कि आपसी सहमति हुए तलाक और समझौते के अनुसार, पति ने पत्नी को 2 किश्तों में 1.5 करोड़ रुपये दिए। 14 लाख रुपये कार खरीदने के लिए दिए और कुछ गहने भी दिए।। पत्नी ने जॉइंट अकाउंट से 2.5 करोड़ रुपये पति को ट्रांसफर करने पर सहमति जताई। फिर दोनों ने आपसी सहमति से तलाक लिया और समझौते के अनुसार लेन-देन किया, लेकिन पत्नी ने अपनी सहमति वापस ले ली और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत भी दे दी, जिस पर मजिस्ट्रेट ने समन जारी किए।

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सहमति वापस ले सकते हैं, पर शर्त अनुसार

सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट देते हुए बताया कि आपसी सहमति से हुए तलाक के मामलों में सहमति वापस लेने का अधिकार पति-पत्नी दोनों पक्षों को है, लेकिन अगर दोनों पक्ष आपसी सहमति से सभी विवादों का निपटारा कर लें तो यह अधिकार नहीं मिलता। मध्यस्थता के जरिए आपसी सहमति से हुए तलाक भी कानून के अनुसार होते हैं और ऐसे में इस कानूनी प्रक्रिया से पीछे हटना न्यायिक प्रक्रिया और मध्यस्थता व्यवस्था की बुनियाद के लिए ठीक नहीं है और इससे व्यवस्था से लोगों का भरोसा उठ सकता है।

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समझौते से हटने के पीछे पत्नी की दलील

बेंच ने कहा कि अगर दोनों पक्षों में से कोई बिना उचित कारण के समझौते से पीछे हटता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए, ताकि मध्यस्थता प्रक्रिया के दुरुपयोग पर रोक लगे। पत्नी ने समझौते से पीछे हटते हुए दलील दी कि पति ने उसे 120 करोड़ के गहने और 50 करोड़ के सोने के बिस्कुट देने का वादा किया था, लेकिन उन्हें समझौते में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि वह टैक्स से बचना चाहता था। इस दलील पर बेंच ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह न्याय प्रणाली का अनादर है।