विदेश मंत्रालय ने तोशाखाना में सुरक्षित विदेशी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा भारत सरकार के अधिकारियों और प्रतिनिधियों को भेंट किए गए करीब 300 उपहारों की ई-नीलामी जारी की है. बता दें कि इस नीलामी में लग्जरी घड़ियों, आभूषणों, स्मृति चिन्हों, सजावटी वस्तुओं और अन्य दुर्लभ उपहारों को शामिल किया गया है.
ई-नीलामी आठ जून से शुरू हुई थी और 30 जून तक चलेगी. तोशाखाना वह आधिकारिक भंडार है, जहां विदेश यात्राओं या भारत में विदेशी प्रतिनिधियों से सरकारी अधिकारियों को प्राप्त उपहार सुरक्षित रखे जाते हैं.
संशोधित तोशाखाना नियम, 2024 के तहत पहली बार इन उपहारों की सार्वजनिक ई-नीलामी आयोजित की जा रही है. इसमें केवल भारत के निवासी नागरिक पंजीकरण कर बोली लगा सकते हैं और खरीदी गई वस्तुओं की डिलीवरी भी देश के भीतर ही की जाएगी.
नीलामी में रोलैक्स की यॉट मास्टर-2 घड़ी
नीलामी में सबसे आकर्षक वस्तुओं में लग्जरी ब्रांड रोलैक्स की यॉट मास्टर-2 घड़ी शामिल है, जिसकी शुरुआती बोली 16.52 लाख रुपये रखी गई है.
इसके अलावा कार्टियर की प्रतिष्ठित सैंटोस ड्यूमोंट शृ्ंखला की घड़ी भी नीलामी का हिस्सा है, जिसकी आधार कीमत 5.02 लाख रुपये निर्धारित की गई है.
पोर्टल पर इस घड़ी को आधुनिक तकनीक और कालातीत डिजाइन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया है. स्टेनलेस स्टील से बनी यह घड़ी प्रसिद्ध विमान चालक अल्बर्टो सैंटोस ड्यूमोंट की विरासत से प्रेरित मानी जाती है.
अल अरबाश ब्रांड का एक शानदार आभूषण सेट भी शामिल
नीलामी में कुवैत के प्रसिद्ध अल अरबाश ब्रांड का एक शानदार आभूषण सेट भी शामिल है. करीब 9.52 लाख रुपये की आधार कीमत वाले इस सेट में नेकलेस, ब्रेसलेट और ईयररिंग्स शामिल हैं. यह ब्रांड पारंपरिक शिल्पकला और पारिवारिक विरासत के लिए जाना जाता है.
प्राचीन चांदी के सिगरेट बॉक्स की कीमत 12,030 रुपये
इसके अलावा प्राचीन चांदी का सिगरेट बॉक्स भी बोली के लिए उपलब्ध है, जिसकी शुरुआती कीमत 12,030 रुपये रखी गई है. इस दुर्लभ वस्तु के ढक्कन पर हाथ से उकेरी गई कलात्मक आकृतियां हैं, जबकि इसका भीतरी हिस्सा अब भी चमकदार चांदी की गुणवत्ता को दर्शाता है. इसे उत्कृष्ट धातु शिल्पकला का नमूना बताया गया है.
ई-नीलामी पोर्टल पर प्रत्येक वस्तु के साथ उसका संक्षिप्त विवरण और पृष्ठभूमि भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि जो भी इसे खरीदना चाहता है वो उसकी विशेषताओं और महत्व को समझ सकें.
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नीलामी में शामिल अधिकांश वस्तुएं विरासत, स्मृति, सजावट, संग्रहणीय या औपचारिक महत्व की हैं और जरूरी नहीं कि उनका व्यावसायिक या दैनिक उपयोग हो.
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तोशाखाना क्या होता है?
‘तोशाखाना’ शब्द फारसी भाषा से आया है, जिसका अर्थ होता है ‘खजाना’ या ‘तोहफों का भंडार’. इसका इस्तेमाल मुगल काल में उन जगहों के लिए किया जाता था, जहां शासकों और राजपरिवारों को मिले उपहारों और सम्मान स्वरूप मिली वस्तुओं को सुरक्षित रखा जाता था. बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान भी विदेशी शासकों या रियासतों से मिले उपहार सरकारी खजाने में जमा किए जाते थे. इन्हीं परंपराओं के आधार पर आधुनिक भारत में भी तोशाखाना व्यवस्था जारी रखी गई.
भारत में प्रधानमंत्री, मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विदेश यात्राओं पर जाने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को विदेशों से मिले उपहार तोशाखाना में जमा कराने होते हैं. सरकारी नियमों के मुताबिक, किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को आधिकारिक यात्रा के दौरान मिले उपहार को भारत लौटने के 30 दिनों के भीतर तोशाखाना में जमा कराना जरूरी होता है.
कौन अपने पास रख सकता है उपहार?
मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि किसी उपहार की कीमत 5,000 रुपये तक है, तो संबंधित अधिकारी उसे अपने पास रख सकता है. यदि उपहार की कीमत इससे अधिक होती है, तो उसका मूल्यांकन किया जाता है. अधिकारी चाहे तो तय की गई राशि सरकार को जमा कराकर उस उपहार को खरीद सकता है. यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो वह वस्तु तोशाखाना में जमा रहती है और बाद में नीलामी के जरिए बेची जा सकती है. इसके अलावा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से मिले कुछ उपहार अपने पास रखने की अनुमति है, लेकिन यदि उनकी कीमत 25,000 रुपये से अधिक है तो इसकी जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होता है.
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