सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट से जुड़े केसों की सुनवाई को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट को नोटिस जारी किया और जल्द से जल्द जवाब मांगा है. मामला एक जज से जुड़ा है, जो खुद रेप केस का आरोपी है, लेकिन वह कोर्टरूम में बैठकर पॉक्सो एक्ट में दर्ज केसों की सुनवाई कर रहा था. मामले के बारे में पता चलते ही सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया और नोटिस जारी कर पूछा है कि दुष्कर्म का आरोपी जज पॉक्सो केस की सुनवाई कैसे कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म केस में दाखिल याचिका पर विचार करने की अनुमति दी, जिसमें दुष्कर्म के आरोप अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पर लगाए गए हैं.
जज पर महिला के यौन शोषण के आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने नोटिस जारी किया. उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के खिलाफ याचिका दायर हुई थी, जिसमें उस पर महिला के यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं. बावजूद इसके वह जज पॉक्सो एक्ट से जुड़े केसों की सुनवाई कर रहा था. याचिकाकर्ता के वकील राकेश कुमार सिंह ने बेंच के समक्ष मामले को उजागर किया और मांग की कि आरोपी जज से न्यायिक कार्य वापस लेना चाहिए, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया था.
शादी का वादा करके जज ने संबंध बनाए
याचिकाकर्ता ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने मामले में चार्जशीट दाखिल की हुई है. 8 दिसंबर 2022 को मयूर विहार पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई गई थी. न्यायिक अधिकारी पर आरोप लगाया गया है कि उसने महिला का यौन शोषण किया है. महिला से उसकी जान पहचान मैट्रिमोनियल साइट पर हुई थी. लेकिन महिला ने आरोप लगाया कि जज ने शादी का झूठा वादा किया और उससे शारीरिक संबंध बनाए. जनवरी 2023 में दिल्ली पुलिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से जज के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगी. लेकिन 2 महीने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने जज को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी.
जज के खिलाफ दिल्ली पुलिस की जांच जारी
दिल्ली पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता के बयान दर्ज कराए. जून 2023 में दिल्ली पुलिस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को रिमाइंडर भेज जज के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने की अनुमति देने से जुड़ी मांग पर जल्द से जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया. दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाब में बताया कि जज के खिलाफ पहले से विजिलेंस जांच चल रही है. अक्टूबर 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच करने की अनुमति दे दी और जज को भी जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया. अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है और सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संज्ञान लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट को नोटिस देकर जवाब मांगा है.