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‘ऊना की चीखें आज भी इंसाफ के दरवाजे पर…’, राहुल गांधी ने पूछा-पीड़ितों को कब मिलेगा न्याय?

ऊना कांड के 10 साल और कोर्ट के फैसले पर राहुल गांधी का बड़ा हमला. बोले- '10 साल से इंसाफ के लिए भटक रहे पीड़ित, क्या यही है बीजेपी का अन्यायपूर्ण मॉडल?' जानिए राहुल ने गुजरात से आए दलित प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद सरकार को कैसे घेरा.

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुजरात के चर्चित ‘ऊना कांड’ के 10 साल पूरे होने पर केंद्र की मोदी सरकार और गुजरात की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि ऊना की चीखें आज भी इंसाफ के लिए तड़प रही हैं और पीड़ित परिवार पिछले एक दशक से न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर हैं. उन्होंने गुजरात सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी शासित राज्य में दलितों और आदिवासियों के साथ “अपमान, हिंसा और हत्या” ही अब कड़वी हकीकत बन चुकी है. राहुल के मुताबिक, न्याय में यह देरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है.

प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में छलका दर्द

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुजरात से आए दलित और आदिवासी समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए इसे ‘बेहद पीड़ादायक और चिंतनशील’ बताया.

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इससे पहले प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी को गुजरात में दलितों और आदिवासियों के साथ हो रहे कथित भेदभाव और हिंसा की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया. इस समूह में 2016 के ऊना कांड के पीड़ित और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल थे. राहुल गांधी ने कहा कि इन वर्गों की आपबीती सुनकर यह साफ है कि संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने लंबे समय बाद भी दोषियों को सजा और पीड़ितों को सम्मान क्यों नहीं मिला?

संविधान और न्याय पर उठाया सवाल

अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि गुजरात का जो मॉडल पेश किया जाता है, वह असल में ‘अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक’ है. उन्होंने चिंता जताई कि इसी दोषपूर्ण मॉडल को अब पूरे देश पर थोपने की कोशिश की जा रही है. राहुल गांधी का मानना है कि संवैधानिक मूल्यों को ताक पर रखकर एक खास वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है.

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इंसाफ की लड़ाई रहेगी जारी

विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी ने स्पष्ट संदेश दिया कि कांग्रेस पार्टी दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के हक की आवाज दबने नहीं देगी. उन्होंने कहा कि न्याय के दरवाजे पर दस्तक देने का सिलसिला तब तक नहीं थमेगा, जब तक ऊना जैसे कांड के पीड़ितों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता.

First published on: Mar 29, 2026 01:02 PM

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About the Author

Vijay Kumar

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.

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