पिछले कुछ सालों से पूरी दुनिया में जो हालात जारी हैं, उन्हें देखकर भारत लगातार अपनी विदेश नीति में बड़े बदलाव कर रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ पॉलिसी से कई देशों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा. ऐसे में भारत किसी एक देश पर डिपेंड ना होकर दुनियाभर के देशों से रिश्ते कायम करने में लगा है. पीएम मोदी धड़ाधड़ विदेश यात्रा कर रहे हैं. ये उनका खास मास्टर स्ट्रोक है, जिससे देश की इकॉनोमी भी मजबूत होगी और बुरे वक्त में मदद भी मिलेगी. खुद अमेरिका के अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत की इस नीति की वाहवाही की है.
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भारत को क्यों बदलना पड़ा पैटर्न?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत अब पुराना ढर्रे को छोड़कर प्लूरिलेटरल कूटनीति को अपना रहा है, जिसका मतलब है कई देशों के साथ खास रिश्ते बनाना और आर्थिक के साथ-साथ डिफेंस डील्स पर काम करना. न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा- अमेरिका और भारत के बीच जो तनाव आया है, उसके बाद से भारत ने अपना पैटर्न बदला है. राष्ट्रपति ट्रंप ने नई टैरिफ पॉलिसी के तहत भारतीय प्रॉडक्ट्स पर भारी शुल्क लगाए. इसके बाद रूस से क्रूड ऑयल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत का एक्सट्रा टैरिफ लगाया. ट्रंप सरकार का कहना था कि भारत के तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध को फायदा हो रहा है. भारत को निर्यात के लिए भी दूसरे इंटरनेशनल मार्केट्स का सहारा लेना पड़ा. वहीं, 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए आपसी हमलों को रोकने का क्रेडिट भी ट्रंप ने लेने की कोशिश की थी.
भारत की रणनीति
आपको बता दें, पीएम मोदी पिछले एक साल में 20 से ज्यादा देशों की यात्रा कर चुके हैं, जबकि दुनियाभर के 13 से ज्यादा नेताओं ने भारत का दौरा किया है. ये यात्राएं सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, बल्कि इस दौरान भारत ने कई बड़े व्यापारिक और रक्षा समझौते किए. भारत के लिए सबसे बड़ी अचीवमेंट रही यूरोपय संघ के साथ फ्री ट्रेड डील यानी FTA, जो दशकों से नहीं हो पा रही थी. इस डील के तहत भारत ने गाड़ियों और वाइन पर कस्टम ड्यूटी को कम करने जैसे कई बड़े फैसले लिए. ब्रिटेन के साथ हुई डील से भारतीय कपड़ों पर टैक्स कम हुआ. वहीं भारत में स्कॉच व्हिस्की जैसी चीजों पर इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती हुई. अब भारत आगे बढ़ते हुए कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने में लगा है. मिडिल ईस्ट और मिडिल एशिया में भी भारत अपनी मौजूदगी दिखा रहा है. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के जरिए भारत अब रूस और चीन जैसे देशों के लिए बांहे फैला रहा है ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति बनी रहे.
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