राम मंदिर दान चोरी विवाद पर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का ड्रामा सुर्खियों में हैं. सांसद पर नाटक के जरिए धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप लगे और पुलिस को शिकायतें दी गईं. उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के वाराणसी में FIR दर्ज हो चुकी है, जिस मामले में प्रयागराज कोर्ट का समन उन्हें मिल चुका है. भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी है, लेकिन पप्पू यादव ने इस केसों पर सवाल उठाया है. उन्होंने विरोध प्रदर्शनों को लेकर सांसदों से जुड़े नियम गिनाए और पूछा कि लोकसभा स्पीकर के आदेश के बिना केस कैसे दर्ज कर सकते हैं? कानून के बारे में जानते नहीं हैं क्या?
पप्पू यादव को 11 अगस्त को पेश होने का आदेश
गत 31 जुलाई को संसद में राम मंदिर दान चोरी के मुद्दे पर एक छोटा-सा नाटक हुआ था. इस नाटक में पप्पू यादव साधु के भेष में थे. विपक्षी सांसद दान पेटी में चंदा डालते हैं और फिर पप्पू यादव दान पेटी लेकर भागने लगते हैं. इस दौरान अखिलेश यादव और राहुल गांधी समेत कई विपक्षी दलों के सांसद मौजूद थे. इसी मामले में वाराणसी में पप्पू यादव, राहुल गांधी, अवधेश प्रसाद के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई. प्रयागराज कोर्ट ने पप्पू यादव को समन भेज 11 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया है. बांसुरी स्वराज ने भी पप्पू यादव और राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी हुई है.
सांसदों पर किन मामलों में दर्ज नहीं हो सकता केस?
सांसदों पर केस दर्ज हो सकते हैं, लेकिन संसद में उन्हें छूट और विशेषाधिकार प्राप्त हैं. इनके तहत अगर सांसद लोकसभा या राज्यसभा के अंदर कुछ बोलते हैं और किसी भी तरीके से बोलते हैं तो उन पर न कोई केस दर्ज किया जाता है और न ही किसी अन्य तरह की कानूनी कार्रवाई की जाती है. संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सांसदों को संसद में ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ मिली है. संसद परिसर में या संसद की किसी कमेटी के सामने सांसद कुछ भी कह जाएं, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होगी. सांसद कोर्ट केस, पुलिस केस या कानूनी कार्रवाई के डर के बिना जनता के मुद्दों को खुलकर बेबाकी से सदन में रख सकते हैं.
सांसदों पर कब किन मामलों में हो सकती कार्रवाई?
विशेषाधिकार मिलने के बावजूद सदन या संसद के अंदर कुछ हरकतें करने पर सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. जैसे क्रिमिनल एक्टिविटी करने पर सांसद के खिलाफ केस दर्ज हो सकता है और गिरफ्तारी भी हो सकती है. सिविल केसों में गिरफ्तारी से राहत मिल सकती है, लेकिन कानूनी कार्रवाई जरूर होती है. सिविल मामलों में गिरफ्तारी से छूट भी पूरी तरह असीमित नहीं है. संसद के अंदर बयान देने या कोई कृत्य करने पर केस नहीं हो सकता. लेकिन संसद परिसर में सांसद अगर कोई कृत्य करता है, जो क्राइम है तो उसके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज कराया जा सकता है. जैसे अगर कोई सांसद संसद में रिश्वत लेता है तो उस मामले में उसके खिलाफ FIR हो सकता है, गिरफ्तारी हो सकती है और और मुकदमा भी चल सकता है.
कानूनी कार्रवाई के लिए स्पीकर की इजाजत चाहिए?
बता दें कि संसद के अंदर लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा सभापति बॉस होते हैं तो उनकी परमिश से ही कोई कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सांसदों को सिविल मामलों में गिरफ्तारी से छूट मिलती है. नियम के अनुसार, किसी सांसद को संसद सत्र शुरू होने से 40 दिन पहले, संसद सत्र के दौरान और संसद सत्र खत्म होने के बाद 40 दिन तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. लेकिन क्रिमिनल केस में गिरफ्तारी से ऐसी छूट नहीं मिलेगी. अगर किसी क्रिमिनल केस में संसद सत्र के दौरान संसद से बाहर गिरफ्तारी हो रही है तो स्पीकर को सूचना देनी होगी. लेकिन संसद परिसर के अंदर अरेस्ट स्पीकर या सभापति की अनुमति से ही होगी.
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