No Confidence Motion: लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने का क्या है नियम, अविश्वास प्रस्ताव के लिए कितने सांसदों के वोट जरूरी?

No Confidence Motion: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया। इसके विरोध में कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाएगी, जिसका नोटिस महासचिव को दे दिया गया है, लेकिन बता दें कि लोकसभा के स्पीकर को पद से हटाने के लिए कुछ नियम हैं, जिनका प्रावधान संविधान में किया गया है।

Lok Sabha Speaker Om Birla vs Rahul Gandhi

लोकसभा स्पीकर पर राहुल गांधी को सदन में न बोलने देने का आरोप है।

No Confidence Motion Rules: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पद से हटाने के लिए विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है। आज विपक्ष के प्रमुख दल कांग्रेस ने लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी सौंप दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर फैसला किया गया। वहीं लोकसभा स्पीकर ने भी महासचिव को नोटिस की जांच करके उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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इसलिए ला जा रहा है अविश्वास प्रस्ताव

बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में बोलने से रोकने, BJP सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कार्रवाई शुरू नही करने, कांग्रेस की महिला सांसदों पर निराधार आरोप लगाने और 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित करने पर स्पीकर को पद से हटाने के लिए लाया गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोकसभा स्पीकर के पद को हटाने के नियम क्या हैं? स्पीकर को पद से कैसे हटाया जा सकता है? अगर नहीं तो आइए हम आपको बताते हैं…

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संविधान में है पद से हटाने का प्रावधान

बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94-C में लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने का प्रावधान है। संविधान के अनुसार, लोकसभा के स्पीकर को पद से हटाने के लिए सदन में अविश्वास प्रस्ताव पारित कराना जरूरी है। वहीं स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की सूचना 14 दिन पहले देनी अनिवार्य है। वहीं अविश्वास प्रस्ताव पर कार्रवाई तभी की जाएगी, जब उस पर लोकसभा के करीब 50 सांसदों के हस्ताक्षर हों। अगर प्रस्ताव को 50 सांसदों का समर्थन नहीं मिला तो प्रस्ताव रिजेक्ट हो जाएगा।

अगर अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार हो जाए तो उस पर चर्चा का दिन निर्धारित किया जाता है। नोटिस स्वीकार होने के बाद 10 दिन के अंदर चर्चा कराना अनिवार्य है। वहीं चर्चा के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाती है। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए लोकसभा में मौजूद और मतदान करने वाले सांसदों का बहुमत अनिवार्य है, लेकिन सिर्फ बहुतम से काम चल जाएगा। इसके लिए संविधान संशोधन अधिनियम को पारित कराने के लिए अनिवार्य 2/3 बहुमत की जरूरत नहीं है।

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विशेष उल्लेखनीय है कि जिस दिन लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने के लिए पेश किए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी, इस दिन सदन की अध्यक्षता लोकसभा स्पीकर नहीं करेंगे, बल्कि उनकी जगह डिप्टी स्पीकर अध्यक्षता करेंगे, क्योंकि स्पीकर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते। दूसरी ओर, अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाने के बाद स्पीकर को तुरंत पद छोड़ना पड़ता है, लेकिन वे सांसद बने रहेंगे। मौजूदा स्पीकर के पद से हटने के बाद नए स्पीकर को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।

स्पीकर को हटाने के आ चुके 3 प्रस्ताव

आजादी के बाद से आज तक लोकसभा स्पीकर के खिलाफ 3 बार अविश्वास प्रस्ताव आ चुके हैं। पहला प्रस्ताव 18 दिसंबर 1954 को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर जी.वी. मावलंकर के खिलाफ लाया गया था, जिसे बहस के बाद सदन ने खारिज कर दिया था। दूसरा प्रस्ताव 24 नवंबर 1966 को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ लाया गया था, जिसे 50 सांसदों का समर्थन नहीं मिलने के कारण खारिज कर दिया गया था। तीसरा प्रस्ताव 15 अप्रैल 1987 को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ लाया गया था, जिसे बहस के बाद खारिज कर दिया गया था।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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