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(प्रशांत गुप्ता, नागपुर)
Nagpur Lok Sabha Election 2024: महाराष्ट्र के चुनावी रण में सबसे हॉट बन चुकी नागपुर सीट पर इस बार बीजेपी के सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती है। वहीं, कांग्रेस भी अपनी खोई साख वापस पाने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। भाजपा की ओर से तीसरी बार हाईवे और ब्रिज मैन के नाम से मशहूर नितिन गडकरी मैदान में हैं। दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार विकास ठाकरे कांग्रेस की साख वापस लाने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं।
देश भर में एक्सप्रेस वे और हाईवे का मॉडल देने वाले नितिन गडकरी का नागपुर की सड़कों पर लोक संवाद चल रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी विकास ठाकरे महायुति के नेताओं के साथ जगह-जगह मीटिंग कर जनता को साध रहे हैं। नागपुर में विकास मॉडल बनाम संविधान बचाने की जंग मुख्य मुद्दा बना हुआ है।
नागपुर में आरएसएस और वीएचपी का हेडक्वार्टर भी है। इसके बाद भी बीजेपी के लिए ये सीट हमेशा चैलेंज रही है। आजादी के बाद से नागपुर कांग्रेस का गढ़ रहा है। लेकिन नितिन गडकरी के कद के आगे कांग्रेस कमजोर होती गई। नागपुर में दोनों उम्मीदवार रथ यात्रा के जरिए वोटरों को साधने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। एक तरफ है नितिन गडकरी की लोक संवाद यात्रा, जिसका नारा है कहो दिल से नितिन जी फिर से। दूसरी तरफ विकास ठाकरे की जन आशीर्वाद यात्रा, जिसका नारा है अबकी बार कांग्रेस सरकार। गडकरी विकास और व्यक्तित्व पर वोट मांग रहे हैं। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार बीजेपी के विकास को झूठ का गुब्बारा बता रहे हैं।
इस बार कांग्रेस के परंपरागत वोट के साथ साथ शिवसेना और एनसीपी की ताकत भी है। हालांकि 2014 से बीजेपी के विजय रथ को कांग्रेस नागपुर में रोकने में असफल रही है। नागपुर में गडकरी की पहचान राजनीति के साथ-साथ सधे हुए प्रबंधक की भी है। देश में एक्सप्रेस वे की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ी, गडकरी का हाईवे मैन का कद भी बढ़ता गया। नागपुर को महाराष्ट्र की उप राजधानी भी कहा जाता है, जो दुनिया में 114वां सबसे बड़ा शहर है।
नागपुर में अब तक आजादी के बाद 18 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। जिसमें 13 बार कांग्रेस जीती है। बीजेपी को महज 3 बार जीत मिली। 1996 में पहली बार नागपुर में बीजेपी का खाता खुला। कांग्रेस से टूटकर बीजेपी में शामिल हुए बनवारीलाल पुरोहित ने कमल खिलाया। उसके बाद कांग्रेस से लगातार 2014 तक नागपुर में विलास मुतेमवार जीतते रहे। लेकिन 2014 में मोदी लहर में नितिन गडकरी ने कांग्रेस के किले को ढहा दिया। लगातार दो बार कांग्रेस को पटकनी देने के बाद गडकरी हैट्रिक की तलाश में हैं।
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