तमिलनाडु की सरकार में सत्ता में हिस्सेदारी की मांग जोर पकड़ती जा रही है और इसको लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और राज्य के नेताओं के बीच अहम बैठक होने जा रही है. यह बैठक 17 तारीख को शाम 4 बजे कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन, दिल्ली में होगी.
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में तमिलनाडु कांग्रेस की ओर से पावर शेयरिंग एग्रीमेंट की मांग कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखी जाएगी. नेताओं की मांग है कि राज्य सरकार में कांग्रेस को न्यूनतम 6 मंत्री पद दिए जाएं.
इस बड़ी मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता विपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष प्रभारी गिरीश, सांसद मानिक टैगोर समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे.
प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी को तमिलनाडु में मौजूदा सीट शेयरिंग से अलग सत्ता में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए. एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, ‘लोकसभा में कांग्रेस लगभग 25 फीसदी सीटों पर चुनाव लड़ती है (40 में से 10 सीटें), जबकि विधानसभा में सिर्फ करीब 10 फीसदी सीटें (234 में से 25) मिलती हैं. इस असंतुलन को ठीक किया जाना जरूरी है.’
पार्टी अब 2021 में मिली 25 विधानसभा सीटों के मुकाबले 35 से 40 सीटों की मांग पर अड़ी है और डीएमके से इस बारे में अपने फैसले को सुनाने पर आतुर है. ऐसे में खड़गे राहुल से होने वाली इस मुलाकात के काफी मायने है.
इसी बीच, अभिनेता से राजनीति में आए विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के उभार के बाद कांग्रेस के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि कई नेता जमीनी सर्वे और विजय की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए टीवीके के साथ संभावित गठबंधन की पैरवी कर रहे हैं.
हालांकि, दूसरी ओर डीएमके ने गठबंधन सरकार को लेकर सख्त रुख अपनाया है. तमिलनाडु सरकार में कैबिनेट मंत्री पेरियासामी ने साफ कहा है कि राज्य में “कोई भी गठबंधन सरकार नहीं बनेगी.” सरकार में भागीदारी के हक में स्टालिन बिल्कुल नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेता मोल भाव के मूड में हैं और अलकमान से हरी झंडी चाहते हैं.