मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सवालों का जवाब दिया और स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कानून का राज कायम रहेगा. जो कोई भी कानून हाथ में लेगा, उसके साथ सख्ती से निपटा जाएगा. चुनाव आयोग के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी. सूत्रों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के विनम्र रवैये के बावजूद ममता बनर्जी ने 'झूठे आरोप लगाए, बदतमीजी की, टेबल ठोकी और चली गईं'.
CEC ने ममता के सवालों का दिया जवाब
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सूत्र ने बताया कि CEC ने ममता के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कानून का शासन चलेगा और आयोग के पास जो कानूनी अधिकार हैं, उसी के तहत कार्रवाई होगी. सूत्रों ने खुलासा किया कि टीएमसी के विधायक चुनाव आयोग और खासतौर पर CEC के खिलाफ खुलेआम अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे चुनाव अधिकारियों को धमकियां भी दे रहे हैं. सूत्रों ने कहा, 'टीएमसी कार्यकर्ताओं और विधायकों द्वारा ईआरओ (SDO/BDO) कार्यालयों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुई हैं'.
यह भी पढ़ें: ‘मकान नाम करो नहीं तो दहेज के केस में फंसा दूंगी…’, 9 साल की मुहब्बत के बाद भी ज्योति ने दबा दिया पति का गला
SIR मामले पर हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
आयोग के सूत्रों ने जोर देकर कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े अधिकारियों पर किसी भी तरह का दबाव, बाधा या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को समय पर मानदेय देने की बात कही, क्योंकि अभी तक 18 हजार रुपये में से केवल 7 हजार ही जारी हुए हैं. साथ ही, तहसीलदार और एसडीएम स्तर के ईआरओ और एईआरओ की तैनाती की मांग की गई. सूत्रों ने बताया कि 20 जनवरी को रिटर्निंग ऑफिसरों की नियुक्ति के लिए सामान्य प्रशासन से एसएम, एसडीओ, राजस्व प्रभागीय अधिकारी स्तर का प्रस्ताव मांगा गया था, लेकिन फिलहाल केवल 67 विधानसभा क्षेत्रों में ही एसडीओ, एसडीएम रैंक के आरओ हैं.
ममता ने CEC को बताया अहंकारी और झूठा
वहीं, चुनाव आयोग के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, 'मैं बहुत दुखी हूं. दिल्ली में लंबे समय से राजनीति में हूं. चार बार मंत्री रही, सात बार सांसद बनी. इतना अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त कभी नहीं देखा. मैंने उन्हें कहा कि आपकी कुर्सी का सम्मान करता हूं, क्योंकि कोई कुर्सी स्थायी नहीं. एक दिन जाना तो पड़ेगा… बंगाल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है. चुनाव लोकतंत्र का त्योहार है, लेकिन आपने 58 लाख लोगों के नाम काट दिए और उन्हें सफाई का मौका तक नहीं दिया.'
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सवालों का जवाब दिया और स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कानून का राज कायम रहेगा. जो कोई भी कानून हाथ में लेगा, उसके साथ सख्ती से निपटा जाएगा. चुनाव आयोग के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी. सूत्रों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के विनम्र रवैये के बावजूद ममता बनर्जी ने ‘झूठे आरोप लगाए, बदतमीजी की, टेबल ठोकी और चली गईं’.
CEC ने ममता के सवालों का दिया जवाब
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सूत्र ने बताया कि CEC ने ममता के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कानून का शासन चलेगा और आयोग के पास जो कानूनी अधिकार हैं, उसी के तहत कार्रवाई होगी. सूत्रों ने खुलासा किया कि टीएमसी के विधायक चुनाव आयोग और खासतौर पर CEC के खिलाफ खुलेआम अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे चुनाव अधिकारियों को धमकियां भी दे रहे हैं. सूत्रों ने कहा, ‘टीएमसी कार्यकर्ताओं और विधायकों द्वारा ईआरओ (SDO/BDO) कार्यालयों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुई हैं’.
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SIR मामले पर हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
आयोग के सूत्रों ने जोर देकर कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े अधिकारियों पर किसी भी तरह का दबाव, बाधा या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को समय पर मानदेय देने की बात कही, क्योंकि अभी तक 18 हजार रुपये में से केवल 7 हजार ही जारी हुए हैं. साथ ही, तहसीलदार और एसडीएम स्तर के ईआरओ और एईआरओ की तैनाती की मांग की गई. सूत्रों ने बताया कि 20 जनवरी को रिटर्निंग ऑफिसरों की नियुक्ति के लिए सामान्य प्रशासन से एसएम, एसडीओ, राजस्व प्रभागीय अधिकारी स्तर का प्रस्ताव मांगा गया था, लेकिन फिलहाल केवल 67 विधानसभा क्षेत्रों में ही एसडीओ, एसडीएम रैंक के आरओ हैं.
ममता ने CEC को बताया अहंकारी और झूठा
वहीं, चुनाव आयोग के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत दुखी हूं. दिल्ली में लंबे समय से राजनीति में हूं. चार बार मंत्री रही, सात बार सांसद बनी. इतना अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त कभी नहीं देखा. मैंने उन्हें कहा कि आपकी कुर्सी का सम्मान करता हूं, क्योंकि कोई कुर्सी स्थायी नहीं. एक दिन जाना तो पड़ेगा… बंगाल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है. चुनाव लोकतंत्र का त्योहार है, लेकिन आपने 58 लाख लोगों के नाम काट दिए और उन्हें सफाई का मौका तक नहीं दिया.’