20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र पर सभी की नज़र टिकी हुई है. ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या केंद्र सरकार इस दौरान परिसीमन बिल पास करवा पाएगी या नहीं. दरअसल, बजट सत्र के दौरान मोदी सरकार ने ये बिल संसद में पेश किया था, लेकिन 54 वोटों से ये गिर गया था. अब उम्मीद की जा रही है कि मानसून सत्र में एक बार फिर सरकार इसे पेश कर सकती है. सत्र शुरू होने से पहले बीजेपी सांसद किरेन रिजिजू ने मीडिया से बात की. उनसे पूछा गया कि अगर परिसीमन बिल संसद में पेश किया जाता है तो क्या उन्हें भरोसा है कि इस बार ये पास हो पाएगा.
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क्या बोले किरेन रिजिजू?
रिजिजू ने कहा कि केंद्र सरकार ने 8 बिलों के बारे में जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय से निकालकर बुलेटिन जारी किया गया है. रिजिजू ने कहा कि अगर सरकार इन बिलों के अलावा कोई विधेयक लेकर आती है, तो उसपर पहले चर्चा होगी और विपक्ष को भी इस बारे में बताया जाएगा. सरकार के बिजनेस के बारे में केंद्र ने सूचना दी है. अगर और कोई बिल भी आता है तो उसके बारे में बिजनेस एडवाइजरी कमेटी को भी बताया जाएगा.
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क्या है परिसीमन बिल?
ये बिल एक संवैधानिक कानून का प्रस्ताव है. अगर ये बिल पास हो जाता है तो सरकार लोकसभा के अलावा बाकी राज्यों की विधानसभा सीटों का दोबारा गठन कर सकती है. सरकार का कहना है कि मकसद देश की बढ़ती जनसंख्या को सही गाइडेंस देना है. पहली बार मोदी सरकार अप्रैल 2026 में बजट सत्र के दौरान ये बिल संसद में लाई थी. बिल में लोकसभा सीटें 550 से 850 करने का प्रस्ताव था. साथ ही महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत करने का भी प्रावधान था. लेकिन विपक्ष ने परिसीमन बिल को समर्थन देने से मना कर दिया. संसद में वोटिंग हुई तो बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े और खिलाफत में 230 वोट, जिसके बाद 54 वोटों की कमी से बिल पास नहीं हो पाया.
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