भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर सरकार ने सोमवार को स्थिति साफ की है. सरकार के मुताबिक, दोनों देशों के बीच डील पर ऑफिशियल साइन तभी किए जाएंगे, जब नया ‘टैरिफ आर्किटेक्चर’ पूरी तरह से तैयार हो जाएगा. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि दोनों देश इस समय डील की बारीक डिटेल्स पर गहन चर्चा कर रहे हैं.
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया, ‘हम इस समय अमेरिका के साथ डिटेल्स पर बातचीत कर रहे हैं. भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर साइन तभी होंगे जब टैरिफ का नया ढांचा लागू हो जाएगा.’
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सरकार ने देश का लेटेस्ट ट्रेड डेटा जारी किया है. डेटा के मुताबिक, फरवरी में भारत का व्यापारिक निर्यात मामूली 0.81 फीसदी घटकर 36.61 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया. वहीं, इस महीने इंपोर्ट 24.11 फीसदी बढ़कर USD 63.71 बिलियन हो गया.
वाणिज्य सचिव ने मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग की वजह से एक्सपोर्ट पर असर पड़ने की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया में चल रहे संकट से जुड़ी लॉजिस्टिक दिक्कतों की वजह से मार्च में शिपमेंट में गिरावट देखी जा सकती है.
बता दें, ईरान के खिलाफ US और इजरायल सेना ने 28 फरवरी को हमला कर दिया था. इस जंग का असर समुद्री ट्रेड रूट पर पड़ा. विशेषकर स्ट्रेटेजिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया गया. ईरान ने जंग शुरू होने के बाद इस रूट को बंद कर दिया था. जो भी जहाज वहां से गुजर रहा है, उस पर ईरान मिसाइलें दाग रहा है. इसकी वजह से कार्गो की आवाजाही और ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर पड़ा है.
इतना ही होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से कई देशों में फ्यूल क्राइसिस भी पैदा हो गया है. भारत में भी एलपीजी और एलएनजी सप्लाई पर असर पड़ा है. होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव के बीच भारत के कुछ ऑयल टैंकर उस रूट से सेफ निकलने में कामयाब जरूर हुए हैं. लेकिन वहां अभी भी सैंकड़ों जहाज रुके हुए हैं. होर्मुज स्ट्रेट के रूट से ग्लोबल खपत का पांचवां हिस्सा क्रूड ऑयल और गैस सप्लाई होता है.