मई की चिलचिलाती गर्मी के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. भारत में मानसून का इंतजार कर रहे करोड़ों लोगों के लिए संकेत बेहद सकारात्मक हैं. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने तय समय पर आगे बढ़ रहा है और 1 जून के आसपास केरल के तट पर दस्तक दे सकता है. दिलचस्प बात यह है कि भारत में बारिश लाने वाले इन बादलों का सीधा कनेक्शन सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया से जुड़ा है.

ऑस्ट्रेलिया का क्या है कनेक्शन?

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो ने ऐलान किया है कि वहां का 'वेट सीजन' आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है. अब आप सोच रहे होंगे कि ऑस्ट्रेलिया की बारिश रुकने से भारत का क्या लेना-देना? असल में, भूमध्य रेखा के पास बादलों और बारिश की एक अदृश्य बेल्ट होती है.

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हर साल, बिना चूके, यह पट्टी उत्तरी हेमिस्फीयर में गर्मी आने पर उत्तर की ओर और दक्षिणी हेमिस्फीयर में गर्मी आने पर दक्षिण की ओर खिसक जाती है. यह सूरज के पीछे चलती है, और जहां भी जाती है, बारिश लाती है. जब ऑस्ट्रेलिया में बारिश का मौसम खत्म होता है, तो यह पट्टी ज्यादा मजबूती से उत्तर की ओर खिसकना शुरू कर देती है. जैसे-जैसे यह खिसकती है, यह समुद्र से नमी वाली हवाओं को दक्षिण एशिया की ओर खींचती है.

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कहां तक पहुंचे बादल?

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून की यह 'अदृश्य बेल्ट' अब मालदीव को पार कर श्रीलंका और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की ओर बढ़ रही है. अगले 10-15 दिनों में मानसून अंडमान पहुंच सकता है. सब कुछ ठीक रहा तो 1 जून को केरल में पहली मानसूनी बारिश होगी. तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में अभी से गरज के साथ बौछारें पड़नी शुरू हो गई हैं, जो मानसून के आने की पूर्व सूचना है.

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बदलाव का संकेत

उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में इन दिनों कभी भीषण गर्मी तो कभी अचानक आंधी-बारिश और ओले गिर रहे हैं. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'सीजनल ट्रांजिशन' है. मौसम विभाग के मुताबिक, अगले सात दिनों में तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल में बारिश होने का अनुमान है. ये इस बात का एक अहम मौसमी संकेत है कि मॉनसून अपने तय समय पर आगे बढ़ रहा है.